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देहरादून। उत्तराखंड में सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य की सड़कों की खराब हालत को लेकर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि हर वर्ष सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़कें क्षतिग्रस्त हैं, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

विपक्ष का आरोप है कि सरकार की घोषणाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाती हैं और बरसात के मौसम में सड़कें और अधिक खराब हो जाती हैं। कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य के कई हिस्सों में सड़कें दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं तथा समय पर मरम्मत कार्य नहीं होने से लोगों का आक्रोश बढ़ रहा है।

वहीं भारतीय जनता पार्टी और राज्य सरकार ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि प्रदेश में सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि मानसून से पहले सड़कों की मरम्मत और रखरखाव के लिए व्यापक अभियान चलाया गया है तथा संबंधित विभागों को 15 नवंबर तक सड़कों को बेहतर स्थिति में लाने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार ने यह भी कहा कि उत्तराखंड में सड़क संपर्क को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कार्य जारी है। इनमें चारधाम ऑल वेदर रोड परियोजना और मानसखंड मंदिरमाला मिशन प्रमुख हैं। सरकार के अनुसार इन योजनाओं से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी, जिससे स्थानीय लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम जनता की अपेक्षा है कि सड़कों की स्थिति में वास्तविक सुधार दिखाई दे। विशेषकर मानसून के दौरान सुरक्षित और सुगम यातायात सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर सड़क सुधार कार्य कितनी प्रभावी ढंग से पूरे किए जाते हैं और जनता को इसका कितना लाभ मिलता है।