पोखरी में बड़ा राजनीतिक बवाल: यूकेडी कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का घेराव, कर्णप्रयाग हिंसा और बदहाल सड़कों पर फूटा आक्रोश
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पोखरी में राजनीतिक तनाव: यूकेडी कार्यकर्ताओं ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का किया घेराव, क्षेत्र में भारी हंगामा

उत्तराखंड के चमोली जिले के पोखरी क्षेत्र में उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब महेंद्र भट्ट का दौरा अचानक भारी विरोध और नारेबाजी में बदल गया। उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कार्यकर्ताओं ने उनके काफिले को घेरकर जोरदार प्रदर्शन किया, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी और तनाव की स्थिति बन गई।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व यूकेडी नेता बीरू सजवाण ने किया, जहां कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारे लगाते हुए स्थानीय मुद्दों को लेकर तीखी नाराजगी जाहिर की।


कर्णप्रयाग हिंसा बना मुख्य कारण

विरोध का सबसे बड़ा कारण हाल ही में चमोली जिले के कर्णप्रयाग क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प बताया जा रहा है। आरोप है कि इस घटना में कुछ बाहरी लोगों और स्थानीय निवासियों के बीच तनाव इतना बढ़ गया कि मामला हिंसक झड़प में बदल गया।

यूकेडी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि इस दौरान धारदार हथियारों का इस्तेमाल हुआ, जिससे स्थानीय लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन इस मामले में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई करने में विफल रहा है।

प्रदर्शन के दौरान यह मांग भी जोरदार तरीके से उठाई गई कि घटना की जांच किसी भी राजनीतिक दबाव से मुक्त होकर होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।


पोखरी की बदहाल सड़कें भी बनी बड़ा मुद्दा

विरोध का दूसरा बड़ा कारण पोखरी और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों की जर्जर सड़क व्यवस्था रही। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि लंबे समय से क्षेत्र की सड़कें खराब हालत में हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गड्ढों और खराब मार्गों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं और यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। यूकेडी कार्यकर्ताओं ने इसे सरकार की गंभीर लापरवाही बताया और तत्काल सुधार कार्य शुरू करने की मांग की।


मौके पर तनाव और धक्का-मुक्की

घटना के समय जब महेंद्र भट्ट का काफिला पोखरी पहुंचा, तो यूकेडी कार्यकर्ताओं ने अचानक उन्हें घेर लिया और जोरदार विरोध शुरू कर दिया। इस दौरान दोनों पक्षों—भाजपा कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों—के बीच तीखी बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति भी बन गई।

मौके पर स्थिति कुछ देर के लिए बेहद तनावपूर्ण हो गई, जिससे स्थानीय बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी फैल गई। हालात को देखते हुए पुलिस को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया।


पुलिस ने संभाला हालात, जांच की संभावना

स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में लिया और भीड़ को तितर-बितर किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़े नुकसान या गंभीर चोट की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पूरे मामले को संवेदनशील मानते हुए प्रशासन सतर्क है।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि विरोध प्रदर्शन पूर्व नियोजित था या अचानक भड़की भीड़ का परिणाम था।


राजनीतिक सरगर्मी बढ़ी

इस घटना के बाद चमोली और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। यूकेडी ने सरकार पर स्थानीय समस्याओं की अनदेखी और कानून-व्यवस्था में ढिलाई का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा पक्ष इसे राजनीतिक प्रदर्शन करार दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है, खासकर कर्णप्रयाग हिंसा और ग्रामीण सड़कों की हालत को लेकर।