Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड के शारीरिक (व्यायाम) प्रशिक्षित बेरोजगारों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। शिक्षा निदेशालय, ननूरखेड़ा में 4 जून से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे प्रशिक्षित बेरोजगारों ने अपनी मांगों के समर्थन में अब आंदोलन को और उग्र करने का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से धरना देने और क्रमिक अनशन चलाने के बावजूद सरकार, शासन और प्रशासन की ओर से उनकी समस्याओं पर कोई सकारात्मक पहल नहीं की गई है।

शारीरिक प्रशिक्षित बेरोजगारों ने किया शिक्षा मंत्री आवास का घेराव, मांग पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडे ने कहा कि शिक्षा निदेशालय में धरने को 21 दिन से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन अब तक सरकार ने शारीरिक प्रशिक्षित बेरोजगारों की मांगों पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। इसी के विरोध में 19 जून से क्रमिक अनशन शुरू किया गया। अनशन के छठे दिन गिरीश मिश्रा, संजय कोरंगा और गोविंद सिंह क्रमिक अनशन पर बैठे। आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि जल्द उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तीव्र करने के लिए बाध्य होंगे।

शारीरिक प्रशिक्षित बेरोजगारों की प्रमुख मांग उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शारीरिक शिक्षक (व्यायाम शिक्षक) के पदों को सृजित करने से जुड़ी है। संगठन ने मांग की है कि फाइल संख्या 77006 को वित्त विभाग से शीघ्र मंजूरी दिलाकर कैबिनेट में पारित किया जाए, ताकि लंबे समय से प्रतीक्षारत प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार का अवसर मिल सके।

इस बीच रविवार को परेड ग्राउंड से शिक्षा मंत्री आवास तक शारीरिक प्रशिक्षित बेरोजगार संगठन ने प्रदेश अध्यक्ष जगदीश चंद्र पांडे के नेतृत्व में मार्च निकालकर घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। प्रदर्शन में अनिल राज, यशपाल गोसाई, आलोक शाह, प्रदीप बिष्ट, गिरीश मिश्रा, संजय कोरंगा, प्रकाश नेगी, भूपेंद्र नेगी, महावीर सिंह, पल्लवी नेगी, मीना, पुष्पा नौटियाल, विनीता रावत, शर्मिला दास, सुमन सिंह नेगी, कल्पना भट्ट, जितेंद्र कुमार, प्रवीण राजपूत, अनिल तड़ियाल, भुवनेश बिष्ट, योगेंबर नेगी, देवेंद्र कुकरेती, रवि ठाकुर, अकरम अली, वीरेंद्र खंडूरी, अनूप तिवारी, सुरेश ध्यानी, दर्शन लाल, दुर्गेश प्रसाद भट्ट, गोविंद प्रसाद सहित बड़ी संख्या में प्रशिक्षित बेरोजगार शामिल रहे।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी रूप दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों की मेहनत और प्रशिक्षण के बावजूद रोजगार न मिलने से युवाओं में गहरी निराशा है और अब वे अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं।