उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट: कई जिलों में हाई अलर्ट, रुद्रप्रयाग के बसुकेदार में भू-धंसाव से बढ़ी चिंता
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देहरादून।  दैनिक प्रभातवाणी। 

उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के कई पर्वतीय जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। भूस्खलन, भू-धंसाव और नदियों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका के मद्देनजर लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मौसम विभाग ने उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना जताई है। कई स्थानों पर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा पर्वतीय क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है।

वहीं देहरादून, मसूरी और काठगोदाम सहित कई क्षेत्रों में लगातार बारिश से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को उमस से राहत मिली है।

बसुकेदार में भू-धंसाव से ग्रामीणों में दहशत

रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार (कौशलपुर) क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण भू-धंसाव (Land Subsidence) की घटनाएं सामने आई हैं। कई घरों और खेतों में दरारें पड़ने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन और आवश्यक सहायता की मांग की है।

जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी शुरू कर दी है और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है।

चारधाम यात्रियों के लिए विशेष सलाह

प्रशासन ने केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालुओं से मौसम और सड़क की ताजा जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की अपील की है। बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

नदी किनारों पर जाने से बचें

अलकनंदा, मंदाकिनी, भागीरथी सहित अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए लोगों से नदी किनारों, नालों और संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और पर्यटकों से विशेष सतर्कता बरतने का अनुरोध किया है।

सुरक्षा सलाह

  • मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक एडवाइजरी का पालन करें।
  • भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचें।
  • गरज-चमक के दौरान खुले स्थानों और ऊंचे पेड़ों के नीचे खड़े न हों।
  • किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग से तुरंत संपर्क करें।