Spread the loveपिथौरागढ़। दैनिक प्रभातवाणी । उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की होनहार बॉक्सर काजल फर्स्वाण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए एशियन अंडर-23 बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए रजत पदक (Silver Medal) जीतकर पूरे प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद अपने गृहक्षेत्र मदकोट पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने उनका अभूतपूर्व स्वागत किया। मदकोट में ऐतिहासिक स्वागत काजल फर्स्वाण के गांव पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। स्थानीय लोगों, खेल प्रेमियों, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और परिजनों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। पारंपरिक ढोल-दमाऊ की गूंज के बीच विजय जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। लोगों ने भारत माता के जयकारों और काजल के सम्मान में नारे लगाकर उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड का बढ़ाया मान एशियन अंडर-23 बॉक्सिंग चैंपियनशिप में रजत पदक जीतना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। काजल ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया और भारत के लिए सिल्वर मेडल सुनिश्चित किया। उनकी सफलता ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उत्तराखंड की प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। सीमांत क्षेत्र की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा पिथौरागढ़ जैसे सीमांत और पर्वतीय क्षेत्र से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतना आसान नहीं होता। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद काजल ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी उपलब्धि विशेष रूप से प्रदेश की बेटियों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। खेल प्रेमियों में खुशी की लहर काजल की सफलता से पूरे जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी जीत ने यह संदेश दिया है कि यदि प्रतिभा को सही दिशा और अवसर मिले तो उत्तराखंड के युवा विश्व स्तर पर भी देश का नाम रोशन कर सकते हैं। लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में काजल स्वर्ण पदक जीतकर भारत का गौरव और बढ़ाएंगी। खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाओं की उम्मीद स्थानीय खेल प्रेमियों ने सरकार से मांग की कि प्रदेश के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, ताकि अधिक से अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर सकें। उनका कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने की आवश्यकता है। उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण काजल फर्स्वाण की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। उनकी मेहनत और संघर्ष ने यह साबित किया है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इच्छाशक्ति के सामने छोटी पड़ जाती हैं। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और प्रदेश में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा देगी। Post Views: 9 Post navigation जंतर-मंतर पर वर्दी में ‘इस्तीफा’ देने वाले उत्तराखंड पुलिस कांस्टेबल शेर सिंह पर पुलिस का बड़ा खुलासा, बताया निलंबित और गंभीर मामलों का आरोपी डोईवाला में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, छोटे किसानों के हितों की सुरक्षा की मांग