Spread the loveकोटाबाग (नैनीताल) दैनिक प्रभातवाणी । उत्तराखंड में जैविक एवं टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नैनीताल जिले के कोटाबाग ब्लॉक में नाबार्ड (NABARD) के सहयोग से जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई (Bio-Control Production Unit) का शुभारंभ किया गया। इस परियोजना को गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के तकनीकी सहयोग से स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के सुरक्षित और किफायती विकल्प उपलब्ध कराना तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना है। किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ नई जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई के माध्यम से किसानों को स्थानीय स्तर पर जैविक कीट नियंत्रण उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे। अब किसानों को महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे खेती की लागत में कमी आएगी, उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जैव नियंत्रण तकनीक अपनाने से फसलों पर कीटों का प्रभाव कम किया जा सकता है, जबकि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण का संतुलन भी बना रहता है। क्या होती है जैव नियंत्रण तकनीक? जैव नियंत्रण (Biological Control) ऐसी वैज्ञानिक पद्धति है, जिसमें फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों और रोगों को नियंत्रित करने के लिए प्राकृतिक जीवों, लाभकारी सूक्ष्मजीवों, फफूंद, बैक्टीरिया और अन्य जैविक एजेंटों का उपयोग किया जाता है। यह रासायनिक कीटनाशकों की तुलना में अधिक सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प माना जाता है। रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता होगी कम उत्तराखंड में फल, सब्जी और अन्य नकदी फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। इन फसलों में कीट नियंत्रण के लिए अक्सर रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग होता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ती है और मिट्टी एवं जल स्रोतों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नई जैव नियंत्रण इकाई किसानों को कम लागत में सुरक्षित जैविक विकल्प उपलब्ध कराएगी, जिससे रासायनिक दवाओं का उपयोग धीरे-धीरे घट सकेगा। जैविक खेती को मिलेगा प्रोत्साहन उत्तराखंड सरकार और विभिन्न संस्थाएं लंबे समय से राज्य में जैविक खेती को बढ़ावा देने के प्रयास कर रही हैं। नाबार्ड और जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय की यह संयुक्त पहल उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों का लाभ मिलेगा। स्थानीय रोजगार की भी संभावना इस उत्पादन इकाई के संचालन से स्थानीय युवाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे जैव नियंत्रण तकनीकों का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। विशेषज्ञों की राय कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान जैव नियंत्रण तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाते हैं तो इससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होगी, कृषि उत्पादों में रासायनिक अवशेष कम होंगे और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध होगी। कोटाबाग में शुरू हुई जैव नियंत्रण उत्पादन इकाई केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि उत्तराखंड में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन, सुरक्षित खेती और अधिक आय का अवसर मिलेगा, वहीं राज्य में जैविक खेती को भी नई गति प्राप्त होगी। Post Views: 5 Post navigation उत्तराखंड में 27 से 29 जुलाई तक भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बढ़ा; उत्तरकाशी में युवक की तलाश जारी उत्तराखंड में मानसून का कहर: कई जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट, बागेश्वर में स्कूल बंद, पहाड़ी मार्गों पर यात्रा से बचने की सलाह