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चमोली। चीन सीमा से सटे उत्तराखंड के प्रसिद्ध सीमांत गांव माणा में ड्यूटी पर तैनात पुलिस और होमगार्ड कर्मियों के साथ मारपीट का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि यातायात चेकिंग को लेकर हुए विवाद के बाद असम रेजीमेंट के मेजर समेत 15 सैन्यकर्मियों ने पुलिस और होमगार्ड जवानों के साथ मारपीट की। मामले में चमोली पुलिस ने बदरीनाथ थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जाम और चेकिंग से शुरू हुआ विवाद

बताया गया है कि बदरीनाथ धाम और माणा क्षेत्र में इन दिनों श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों की भारी भीड़ के कारण यातायात का दबाव बना हुआ था। व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और होमगार्ड कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी।

इसी दौरान 64 इंजीनियरिंग असम रेजीमेंट के मेजर अनमोल प्रीत अपने वाहन से वहां पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड कर्मी द्वारा वाहन के कागजात और आवश्यक जांच किए जाने में कुछ समय लगा। इसी बात को लेकर मेजर और होमगार्ड कर्मी के बीच कहासुनी हो गई।

आरोप- बहस के बाद मौके पर पहुंचे सेना के जवान

पुलिस की तहरीर के अनुसार विवाद बढ़ने पर मेजर ने अपने साथियों को मौके पर बुलाया। इसके बाद असम रेजीमेंट के कई जवान वहां पहुंच गए। आरोप है कि इसके बाद पुलिस और होमगार्ड कर्मियों के साथ गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।

मामला यहीं नहीं रुका। पुलिस की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि घायल होमगार्ड कर्मी को सैन्य वाहन में जबरन बैठाकर वहां से ले जाने का प्रयास भी किया गया। मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों और लोगों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।

हालात बिगड़े तो अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया

घटना के बाद माणा क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आसपास के थानों और पुलिस चौकियों से अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा गया।

पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल के आसपास उपलब्ध CCTV फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जुटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मेजर समेत 15 के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा

पुलिस कांस्टेबल विजय सिंह की लिखित तहरीर के आधार पर बदरीनाथ थाने में मेजर अनमोल प्रीत सहित कुल 15 सैन्यकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

मामले में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत चोट पहुंचाने, लोक सेवक को ड्यूटी से रोकने, हमला या आपराधिक बल प्रयोग, कथित तौर पर जबरन ले जाने, दंगा, आपराधिक धमकी और जानबूझकर अपमान करने जैसे आरोप शामिल किए गए हैं।

सेना के उच्च अधिकारियों को भी भेजी जा रही रिपोर्ट

पुलिस स्तर पर मामले की जांच जारी है। घटनाक्रम से संबंधित रिपोर्ट सेना के उच्च अधिकारियों को भी भेजे जाने की बात सामने आई है। ऐसे में अब इस मामले में पुलिस जांच के साथ सैन्य स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की संभावना भी बनी हुई है।

सीमा क्षेत्र में ड्यूटी और अनुशासन पर उठे सवाल

माणा देश का रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्र है। ऐसे संवेदनशील इलाके में सेना और स्थानीय पुलिस दोनों ही सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में यदि ड्यूटी के दौरान दोनों पक्षों के बीच मारपीट जैसी स्थिति सामने आती है, तो यह केवल एक स्थानीय विवाद नहीं बल्कि आपसी समन्वय और अनुशासन से जुड़ा गंभीर मामला बन जाता है।

हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।

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