उत्तराखंड में Flash Flood का खतरा: 12 जिलों के लिए IMD की चेतावनी, भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट
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देहरादून | उत्तराखंड में लगातार बारिश के बीच मौसम और आपदा प्रबंधन को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की Flash Flood Guidance Cell ने राज्य के 12 जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर के Flash Flood Risk की चेतावनी जारी की है।

IMD की यह चेतावनी पूरे जिले में बाढ़ आने की घोषणा नहीं है, बल्कि संबंधित जिलों के कुछ संवेदनशील watersheds और neighbourhoods में अचानक तेज जलप्रवाह, जलभराव और Flash Flood की संभावना को लेकर है।

 इन 12 जिलों में Flash Flood Risk

IMD की चेतावनी में उत्तराखंड के ये 12 जिले शामिल हैं—

अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल।

इन क्षेत्रों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश और पहले से संतृप्त मिट्टी के कारण बारिश का पानी तेजी से बहने और निचले इलाकों में जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।

 Flash Flood क्यों खतरनाक है?

पहाड़ों में Flash Flood का मतलब केवल बड़ी नदी में बाढ़ आना नहीं है। कम समय में तेज बारिश होने पर गदेरे, नाले, छोटी नदियां और बरसाती धाराएं अचानक उफान पर आ सकती हैं।

IMD के अनुसार मिट्टी के अधिक संतृप्त होने की स्थिति में बारिश का पानी जमीन में कम समाने और सतह पर तेजी से बहने की संभावना बढ़ जाती है। इससे अचानक जलभराव और तेज जलप्रवाह पैदा हो सकता है।

यही वजह है कि सामान्य दिखाई देने वाला कोई छोटा नाला भी कुछ ही मिनटों में खतरनाक रूप ले सकता है।

आज किन जिलों में भारी बारिश की संभावना?

देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के 11 अगस्त के जिला-स्तरीय पूर्वानुमान के अनुसार उत्तरकाशी, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में कहीं-कहीं भारी बारिश की संभावना है।

इसके अलावा पर्वतीय जिलों और हरिद्वार में कहीं-कहीं गरज के साथ आकाशीय बिजली और बारिश के तीव्र से अत्यंत तीव्र दौर की संभावना जताई गई है। ऊधमसिंह नगर में भी कहीं-कहीं गरज और आकाशीय बिजली की संभावना है।

 सड़क और पहाड़ी यात्रा पर भी असर

भारी बारिश के दौरान संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन, पत्थर गिरने, सड़क कटाव, पुलों पर दबाव और अचानक जलभराव जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

मौसम केंद्र की एडवाइजरी में भी संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टान गिरने से सड़क एवं राजमार्ग बाधित होने की आशंका बताई गई है। लगातार बारिश के दौरान नदियों और उनकी सहायक धाराओं का जलस्तर भी बढ़ सकता है।

इसलिए पहाड़ों की यात्रा करने वाले यात्रियों और पर्यटकों को अनावश्यक यात्रा से बचने और बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी गई है। बारिश के दौरान खड़ी ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

 प्रशासन 24 घंटे निगरानी पर

Flash Flood की चेतावनी के बाद उत्तराखंड का आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट पर है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्रों के बीच लगातार समन्वय और निगरानी की जा रही है।

प्रशासन को संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने तथा जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव अभियान के लिए संसाधन तैयार रखने को कहा गया है।

 नदी-नालों से दूर रहें

बारिश के दौरान लोगों को नदी, गदेरे, नाले, बरसाती धाराओं और पुल-पुलियों के आसपास जाने से बचना चाहिए। जलस्तर बढ़ने पर किसी भी हालत में बहते पानी को पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में पानी कम दिखाई देने वाला नाला भी अचानक तेज बहाव में बदल सकता है।

12 अगस्त के लिए भी चेतावनी

11 अगस्त की शाम जारी IMD के राष्ट्रीय मौसम बुलेटिन में अगले 24 घंटे के Flash Flood Risk के लिए उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों एवं आसपास के इलाकों में Low Flash Flood Risk बताया गया है। इसका अर्थ है कि 11 अगस्त की 12-जिला चेतावनी और 12 अगस्त के लिए जारी नई चेतावनी को अलग-अलग समझना जरूरी है।

देहरादून मौसम केंद्र के 19:00 बजे के जिला पूर्वानुमान में 12 अगस्त को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून, टिहरी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश/गरज के साथ बौछार तथा बाकी जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना जताई गई है।

 सबसे जरूरी बात

यह 12 जिलों के पूरे क्षेत्र में बाढ़ की चेतावनी नहीं है। IMD ने कुछ विशेष जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में Low to Moderate Flash Flood Risk बताया है। इसलिए इसे “12 जिलों में बाढ़ आने का अलर्ट” लिखने के बजाय “12 जिलों के कुछ इलाकों में Flash Flood Risk” लिखना अधिक सटीक होगा।

लोग नदी-नालों से दूरी बनाए रखें, बारिश के दौरान अनावश्यक पहाड़ी यात्रा न करें और स्थानीय प्रशासन/मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर नजर रखें।

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