युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर धामी सरकार का फोकस, 30% तक सब्सिडी और पर्वतीय जिलों में औद्योगिक पार्क
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देहरादून। उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने पर फोकस तेज कर दिया है। स्वतंत्रता दिवस पर की गई सात बड़ी घोषणाओं के बाद अब इन योजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

सरकार की नई पहल में युवाओं को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और उद्यम स्थापित करने के लिए आसान ऋण उपलब्ध कराने के साथ ही पर्वतीय जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना शामिल है।

18 से 30 वर्ष के युवाओं के लिए नई स्वरोजगार योजना

सरकार ने मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य 18 से 30 वर्ष के युवाओं को अपना उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना और उन्हें नौकरी तलाशने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में आगे बढ़ाना है।

योजना में 30 प्रतिशत तक सब्सिडी

योजना के तहत बैंक से लिए जाने वाले ऋण पर सरकार 30 प्रतिशत तक अनुदान देगी। इससे नए उद्यम शुरू करने वाले युवाओं पर शुरुआती वित्तीय बोझ कम होगा। पहले सब्सिडी की सीमा 15 से 25 प्रतिशत तक थी, जिसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत किया गया है।

विनिर्माण क्षेत्र के लिए 25 लाख रुपये तक, सेवा क्षेत्र के लिए 10 लाख रुपये तक तथा अन्य सूक्ष्म व्यवसायों के लिए 2 लाख रुपये तक की परियोजनाओं को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान है।

IIT-IIM के सहयोग से मिलेगा प्रशिक्षण

सरकार युवाओं को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें उद्यम चलाने के लिए जरूरी कौशल और प्रबंधन का प्रशिक्षण भी देने की तैयारी में है। इसके लिए IIT और IIM जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से निःशुल्क उद्यमिता एवं कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।

सरकार ने बैंक ऋण प्रक्रिया को भी समयबद्ध करने का लक्ष्य रखा है। पांच लाख रुपये तक के ऋण आवेदन को दो सप्ताह और पांच से 25 लाख रुपये तक के आवेदन को तीन सप्ताह में स्वीकृत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 50 हजार युवाओं को रोजगार से जोड़ना है।

स्वरोजगार योजना 2.0 में हजारों लाभार्थी जुड़े

सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के तहत अब तक 35 हजार से अधिक लाभार्थी जुड़ चुके हैं। इस योजना के तहत 1,389 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरण किया गया है और इससे करीब 64,966 रोजगार के अवसर सृजित होने का दावा किया गया है।

प्रदेश में पहली बार युवा आयोग

युवाओं से जुड़े मुद्दों को नीतिगत स्तर पर उठाने के लिए प्रदेश में पहली बार युवा आयोग के गठन का निर्णय लिया गया है। आयोग के माध्यम से शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास और स्वरोजगार से जुड़े विषयों पर युवाओं के सुझाव सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

सरकार की इस पहल को युवाओं को नीतिगत प्रक्रिया से जोड़ने और उनकी अपेक्षाओं को संस्थागत मंच देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क

पर्वतीय जिलों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में विशेष औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं।

इन पार्कों के जरिए स्थानीय संसाधनों, पारंपरिक उत्पादों और युवाओं की क्षमता के अनुरूप उद्योग एवं रोजगार के अवसर विकसित करने की योजना है। सरकार का मानना है कि इससे पहाड़ के युवाओं को रोजगार के लिए मैदानी क्षेत्रों या दूसरे राज्यों की ओर जाने की मजबूरी कम हो सकती है।

सीमांत युवाओं और अग्निवीरों पर भी फोकस

सरकार ने सीमावर्ती गांवों के युवाओं, पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को स्वरोजगार एवं उद्यम स्थापित करने के लिए अतिरिक्त सहायता और प्रोत्साहन देने की भी घोषणा की है।

सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की यह पहल आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ गांवों को आबाद रखने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सरकार का फोकस—विरासत, विकास और रोजगार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार ऐसा उत्तराखंड बनाने की दिशा में काम कर रही है, जहां विकास के साथ राज्य की विरासत और संस्कृति भी सुरक्षित रहे। रोजगार के अवसर बढ़ाकर पलायन की समस्या का समाधान करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार के अनुसार पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। अब सरकारी रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है।

कैसे करें आवेदन?

स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लेने के इच्छुक युवा जिला उद्योग केंद्रों में आयोजित कैंपों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल के जरिए भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के तहत स्वीकृत सब्सिडी को लाभार्थियों के बैंक खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाने की व्यवस्था है।

अब असली परीक्षा क्रियान्वयन की

सरकार की घोषणाएं युवाओं के लिए नए अवसरों का रास्ता खोल सकती हैं, लेकिन इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बैंक ऋण, सब्सिडी, प्रशिक्षण और औद्योगिक पार्क जैसी व्यवस्थाएं कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ जमीन पर उतरती हैं।

अगर योजनाओं का लाभ समय पर वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचता है तो उत्तराखंड में स्थानीय रोजगार बढ़ाने और पलायन रोकने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।