Spread the love काठमांडू/ग्यिरोंग/नई दिल्ली। हिमालय की गोद में बसे नेपाल और चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र की सीमा पर कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है, जिसे पिछले कई दशकों की सबसे बड़ी त्रासदी कहा जा रहा है। 26 अगस्त, बुधवार की सुबह हिमस्खलन और ग्लेशियर के टूटने से शुरू हुई तबाही अब दूसरे खतरे में बदल गई है। नेपाल के अधिकारियों ने भोटेकोशी नदी में दूसरी बाढ़ की चेतावनी जारी कर दी है, जिससे राहत और बचाव कार्य में लगे हजारों जवानों की चिंता और बढ़ गई है। कैसे शुरू हुई तबाही? जांच में सामने आया है कि तिब्बत में ल्हेंडे नदी, जो भोटेकोशी की सहायक नदी है, उसके ऊपरी हिस्से में बर्फ और चट्टानों का एक विशाल हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया। इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया और देखते ही देखते पानी का एक बड़ा जलाशय बन गया। सुबह करीब 8:30 बजे यह प्राकृतिक बांध टूट गया और पानी, मलबा और चट्टानों का सैलाब नीचे की ओर नेपाल के रसुवा जिले के तिमुरे और रसुवागढ़ी इलाके की तरफ बढ़ गया। यह सैलाब पहले भोटेकोशी और फिर त्रिशूली नदी में मिलता चला गया और अपने रास्ते में आने वाले गांवों, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, सड़कों, पुलों और घरों को बहा ले गया। नेपाल में आंकड़ा 2500 पार, 320 भारतीय लापता नेपाल पुलिस और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में मरने वालों की संख्या 579 तक पहुंच गई है। करीब 1,545 लोगों को अब तक सुरक्षित निकाला गया है, लेकिन लापता लोगों का आंकड़ा 2,000 से लेकर 2,482 तक बताया जा रहा है। इस आपदा में सबसे ज्यादा चिंता भारतीय नागरिकों को लेकर है। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को पुष्टि की कि कम से कम 320 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं और उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। ये सभी ज्यादातर हिंदू तीर्थयात्री और पर्यटक थे जो नेपाल-तिब्बत सीमा पर यात्रा कर रहे थे। इसके अलावा 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए थे, जिनमें से 96 भारतीयों को सुरक्षित नेपाल लाया जा चुका है, जबकि 63 मजदूरों को त्रिशूली वन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से बचाया गया है। विदेश मंत्रालय ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं और 149 भारतीयों के सुरक्षित नेपाल पहुंचने की जानकारी दी है। नेपाल सरकार ने इस आपदा से निपटने के लिए 15,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। नेपाली सेना ने बत्तर, नुवाकोट में फील्ड अस्पताल बनाया है जहां घायलों का इलाज किया जा रहा है। चीन-तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में मंजर और भी भयानक सीमा के दूसरी तरफ चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग काउंटी में तबाही का मंजर और भी भयानक है। चीन के सरकारी प्रसारक CCTV और आपातकालीन प्रबंधन विभाग के अनुसार इस बाढ़ में 5 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 558 लोग लापता हैं, जिनमें 260 विदेशी नागरिक शामिल हैं। ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग पर बना पूरा कॉम्प्लेक्स, जिसमें चीन का राष्ट्रीय चिन्ह लगा हुआ भव्य सीमा गेट, कस्टम और इमिग्रेशन की इमारतें थीं, पूरी तरह से नष्ट हो गया है। सैन्य हेलीकॉप्टर से ली गई फुटेज में सिर्फ मलबा और तबाही ही दिखाई दे रही है। चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग खुद गुरुवार को प्रभावित इलाके का दौरा करने पहुंचे। राहत कार्य में सबसे बड़ी बाधा सड़क का बंद होना है। चीनी बचाव दल शुक्रवार को पहली बार सबसे ज्यादा प्रभावित ग्यिरोंग बॉर्डर कॉम्प्लेक्स तक पहुंच पाया और वहां उन्हें “मलबे के अलावा कुछ नहीं मिला”। दूसरी बाढ़ का खतरा क्यों? अब सबसे बड़ा खतरा दूसरी बाढ़ का है। सैटेलाइट तस्वीरों में पता चला है कि जिस जगह पर पहली बार हिमस्खलन हुआ था, वहां चोचेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम पर एक नई अस्थायी झील बन गई है। ये नदियां तिब्बत से निकलकर नेपाल में भोटेकोशी नदी प्रणाली का हिस्सा बनती हैं। अगर यह झील टूटी तो फिर से उसी तीव्रता की बाढ़ आ सकती है। इसी कारण नेपाल और चीन दोनों ने एक साथ ताजा बाढ़ की चेतावनी जारी की है और निचले इलाकों से लोगों को हटाया जा रहा है। नेपाल ने स्वीकारी विदेशी सहायता इतनी बड़ी त्रासदी के बाद नेपाल ने भारत और चीन दोनों की विदेशी सहायता स्वीकार कर ली है। भारत ने कहा है कि वह NDRF की विशेष टनल रेस्क्यू टीम और अन्य राहत सामग्री भेजने के लिए तैयार है। चीन भी अपने बचाव दल और भारी मशीनरी के साथ राहत कार्य में जुटा है। यह आपदा एक बार फिर बताती है कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के कारण कितना संवेदनशील हो गया है। ग्लेशियरों का पिघलना और अचानक आने वाली बाढ़ अब इस क्षेत्र के लिए एक स्थायी खतरा बन गई है। Post Views: 12 Post navigation मध्य पूर्व में आर्थिक भूचाल: हॉर्मुज में 95% व्यापार ठप, ईरान पर ट्रंप की घेराबंदी को नेतन्याहू ने सराहा Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि स्थगित होने पर पाकिस्तान में हड़कंप, 25 करोड़ की जीवनरेखा बताया