Spread the loveनई दिल्ली/इस्लामाबाद। भारत द्वारा 1960 की ऐतिहासिक सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty – IWT) को स्थगित किए जाने के फैसले के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जाकर गुहार लगाना शुरू कर दिया है। डार ने कहा है कि सिंधु नदी प्रणाली उनके 25 करोड़ लोगों की जीवनरेखा (Lifeline) है और भारत इसे हथियार (Weaponisation of Water) के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। दरअसल, यह पूरा विवाद इस साल 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था। इस हमले के बाद भारत की कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) ने फैसला लिया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और भरोसेमंद तरीके से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि को स्थगित (Abeyance) रखा जाएगा। भारत ने 24 अप्रैल को पाकिस्तान को आधिकारिक पत्र भेजकर इस फैसले की जानकारी दी थी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आज फिर दोहराया कि “Indus Waters Treaty will remain in abeyance till Pakistan credibly and irrevocably abjures its support for cross-border terrorism.” यानी संधि तब तक बहाल नहीं होगी। भारत के अमेरिका में राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने भी Newsweek में लेख लिखकर कहा कि पाकिस्तान ने खुद दशकों तक इस संधि की मूल भावना – सद्भावना और मित्रता को नष्ट किया है। इशाक डार ने क्या कहा? पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने वाशिंगटन में एक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार को संबोधित करते हुए और लंदन में ब्रिटिश पाकिस्तानी लॉयर्स फोरम में कहा कि भारत का यह फैसला एकतरफा और गैरकानूनी है। उन्होंने कहा, “The Indus Basin is the lifeline of more than 250 million Pakistanis. Our agriculture, food security, energy production, livelihoods and economic development are deeply dependent upon the waters of the Indus River system.” डार ने आरोप लगाया कि अप्रैल 2025 के बाद से चेनाब और झेलम नदियों के बहाव में अचानक उतार-चढ़ाव देखा गया है और भारत उन पश्चिमी नदियों पर बांध बनाने की कोशिश कर रहा है जो संधि के तहत पाकिस्तान को आवंटित हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है और कहा है कि पाकिस्तान अपने हिस्से के पानी को सुरक्षित करने के लिए सभी विकल्प तलाशेगा। पीपीपी नेता बिलावल भुट्टो-जरदारी ने तो यहां तक कह दिया कि “या तो सिंधु नदी में पानी बहेगा या खून बहेगा।” भारत का सख्त रुख भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह संधि अपने वर्तमान स्वरूप में काम नहीं करेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत अब चेनाब-ब्यास लिंक टनल प्रोजेक्ट सहित कई जल परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि यह पानी का हथियारीकरण है और इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे। पाकिस्तान का कहना है कि संधि में विश्व बैंक भी एक पक्षकार है, इसलिए भारत इसे एकतरफा स्थगित नहीं कर सकता। लेकिन भारत का तर्क है कि परिस्थितियों में मौलिक बदलाव आया है – जनसंख्या वृद्धि, स्वच्छ ऊर्जा की जरूरतें और आतंकवाद जैसी नई चुनौतियां 1960 में नहीं थीं। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय क्या कर रहा है? पाकिस्तान लगातार अमेरिका, ब्रिटेन, विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र सहित अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है। इस्लामाबाद का कहना है कि पानी की सुरक्षा उसकी आर्थिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी है। लेकिन अब तक किसी भी बड़े देश या विश्व बैंक ने भारत के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया है। भारत का पक्ष मजबूत माना जा रहा है क्योंकि उसने आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को शर्त बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में सिंधु जल संधि दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा कूटनीतिक मुद्दा बनने वाला है। Post Views: 13 Post navigation Nepal-Tibet Border Flood Disaster: नेपाल-चीन सीमा पर बाढ़ की तबाही, Bhotekoshi में Second Flood का खतरा, 2500 से ज्यादा लापता, 320 Indians शामिल US-Iran Tension and China Stand: अमेरिका-ईरान तनाव चरम पर, Operation Economic Fury के तहत Hormuz की Naval Blockade, China ने America को दिया झटका