उत्तराखंड की राजनीति में दो बड़े बदलाव, BJP ने बदली टीम तो ED कार्रवाई के बाद हरीश रावत का बड़ा कदम
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देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में 23 सितंबर 2026 को दो घटनाक्रम चर्चा में हैं। एक ओर भारतीय जनता पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के संगठनात्मक प्रभारियों में बदलाव किया है, वहीं दूसरी ओर 2016 के वीपीडीओ भर्ती परीक्षा मामले से जुड़े धनशोधन प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से जुड़ा राजनीतिक घटनाक्रम चर्चा में है।

BJP ने बदली उत्तराखंड की संगठनात्मक टीम

भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड के लिए राम माधव को नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी दुष्यंत गौतम संभाल रहे थे। पार्टी ने बांसुरी स्वराज और अरविंद मेनन को सह-प्रभारी बनाया है। नई नियुक्तियां 23 सितंबर को जारी भाजपा की सूची में सामने आईं।

दुष्यंत गौतम करीब छह साल तक उत्तराखंड के प्रभारी रहे। नई टीम में बदलाव को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठन को नई जिम्मेदारी देने के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि इस बदलाव के पीछे पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक वजहों के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय इसे संगठनात्मक फेरबदल के रूप में ही देखना उचित होगा।

ED की कार्रवाई से हरीश रावत से जुड़ा मामला चर्चा में

दूसरी ओर, 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी यानी VPDO भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले में ED ने देहरादून में कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। कार्रवाई में हरीश रावत के पूर्व OSD और निजी सहायक रहे चंदन सिंह जीना का परिसर भी शामिल था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तलाशी में नकदी, सोना और लग्जरी घड़ियां बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने कांग्रेस के कुछ संगठनात्मक पदों से हटने की पेशकश की थी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनका कांग्रेस छोड़ने का इरादा नहीं है। बाद में रावत ने उन खबरों का भी खंडन किया, जिनमें उनके कांग्रेस से इस्तीफा देने की बात कही गई थी।

रावत ने अपने बयान में यह भी कहा कि उनके सहयोगी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच अपने स्तर पर होनी चाहिए और यदि किसी तरह की संलिप्तता साबित होती है तो वह उससे खुद को अलग मानेंगे। दूसरी ओर, ED की कार्रवाई और बरामदगी से जुड़े आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से ही सामने आएगा।

अब नजर 2027 के चुनावी माहौल पर

एक तरफ भाजपा ने उत्तराखंड में अपनी संगठनात्मक टीम में बदलाव किया है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस में हरीश रावत से जुड़ा घटनाक्रम चर्चा में है। ऐसे समय में दोनों प्रमुख दलों की गतिविधियां इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं क्योंकि राज्य में 2027 का विधानसभा चुनाव अगले बड़े राजनीतिक मुकाबले के रूप में सामने है।

रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAYAVANI

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