उत्तराखंड ने रचा इतिहास: 98.7% साक्षरता दर के साथ बना देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य
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देहरादून। दैनिक प्रभातवाणी।

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तराखंड ने एक ऐसा इतिहास रच दिया है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा। राज्य ने वयस्क साक्षरता के राष्ट्रीय मानकों को पार करते हुए 98.7 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल कर देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह उपलब्धि केवल एक सांख्यिकीय सफलता नहीं, बल्कि वर्षों से चल रहे शिक्षा अभियानों, सरकारी नीतियों, शिक्षकों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

राज्य सरकार के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण साक्षर राज्य माने जाने के लिए निर्धारित 95 प्रतिशत साक्षरता दर के मानक को उत्तराखंड ने उल्लेखनीय अंतर से पार कर लिया है। इस उपलब्धि के बाद उत्तराखंड अब उन चुनिंदा राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जिन्होंने निरक्षरता के विरुद्ध व्यापक अभियान चलाकर लगभग सार्वभौमिक साक्षरता हासिल की है।

राज्यपाल की मंजूरी के बाद मिली औपचारिक मान्यता

इस ऐतिहासिक उपलब्धि को 8 जुलाई 2026 को औपचारिक रूप से अंतिम स्वीकृति मिली, जब उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने पूर्ण साक्षर राज्य घोषित किए जाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी प्रदान की।

इससे पहले 18 जून 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई थी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी की गईं और अंततः उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य के रूप में मान्यता मिल गई।

दो वर्षों में अभूतपूर्व छलांग

उत्तराखंड की यह सफलता इसलिए भी विशेष है क्योंकि राज्य ने बहुत कम समय में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

वर्ष 2023-24 में राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी। लगातार चलाए गए अभियान, घर-घर सर्वेक्षण, विशेष शिक्षण केंद्रों की स्थापना और स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी के कारण यह आंकड़ा केवल दो वर्षों में बढ़कर 98.7 प्रतिशत तक पहुंच गया। अर्थात राज्य ने 14.9 प्रतिशत की रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतने कम समय में इतनी बड़ी प्रगति देश के सबसे सफल वयस्क साक्षरता अभियानों में से एक मानी जा सकती है।

अब इन राज्यों की श्रेणी में शामिल हुआ उत्तराखंड

इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड अब भारत का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम यह उपलब्धि प्राप्त कर चुके हैं।

उत्तराखंड का इस सूची में शामिल होना शिक्षा के क्षेत्र में राज्य की प्रतिबद्धता और प्रभावी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

‘उल्लास’ योजना बनी सफलता की आधारशिला

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के पीछे केंद्र सरकार की उल्लास (Understanding Lifelong Learning for All in Society – ULLAS) नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

इस योजना के अंतर्गत 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के ऐसे लोगों को चिन्हित किया गया जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे। उन्हें केवल अक्षर ज्ञान ही नहीं, बल्कि—

  • पढ़ना और लिखना
  • बुनियादी गणित
  • डिजिटल साक्षरता
  • वित्तीय साक्षरता
  • जीवनोपयोगी कौशल
  • सरकारी सेवाओं का उपयोग

जैसे विषयों का भी प्रशिक्षण दिया गया।

इस अभियान का उद्देश्य केवल लोगों को साक्षर बनाना नहीं था, बल्कि उन्हें आधुनिक जीवन के लिए सक्षम बनाना भी था।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से मिली नई दिशा

राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया। इसके अंतर्गत वयस्क शिक्षा को नई प्राथमिकता दी गई।

व्यापक सर्वेक्षण कर निरक्षर लोगों की पहचान की गई। प्रत्येक जिले में लक्ष्य निर्धारित किए गए और ब्लॉक स्तर तक निगरानी व्यवस्था विकसित की गई। नियमित मूल्यांकन और फॉलो-अप से यह सुनिश्चित किया गया कि प्रत्येक शिक्षार्थी न्यूनतम साक्षरता स्तर प्राप्त करे।

दुर्गम पहाड़ों तक पहुंची शिक्षा

उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं। दूरस्थ पर्वतीय गांवों तक शिक्षा पहुंचाना हमेशा कठिन रहा है।

फिर भी शिक्षा विभाग ने स्वयंसेवी शिक्षकों, स्थानीय निकायों, ग्राम प्रधानों, महिला समूहों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से गांव-गांव तक अभियान चलाया।

विशेष रूप से इन वर्गों पर ध्यान दिया गया—

  • महिलाएं
  • अनुसूचित जाति (SC)
  • अनुसूचित जनजाति (ST)
  • आर्थिक रूप से कमजोर परिवार
  • दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी
  • स्कूल छोड़ चुके किशोर एवं वयस्क

इन वर्गों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए विशेष अध्ययन केंद्र और लचीले समय की कक्षाएं संचालित की गईं।

डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर भी विशेष जोर

आज केवल पढ़ना-लिखना ही पर्याप्त नहीं माना जाता। इसी कारण अभियान में डिजिटल तकनीक का उपयोग सिखाने पर भी विशेष बल दिया गया।

प्रतिभागियों को मोबाइल फोन का उपयोग, ऑनलाइन भुगतान, डिजिटल बैंकिंग, सरकारी पोर्टलों का इस्तेमाल, आधार आधारित सेवाएं, ऑनलाइन आवेदन और साइबर सुरक्षा जैसी बुनियादी जानकारी भी दी गई।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिक डिजिटल भारत अभियान से भी तेजी से जुड़ पाए।

सामाजिक और आर्थिक विकास को मिलेगा बल

विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण साक्षरता का प्रभाव केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा।

इसके माध्यम से—

  • रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
  • महिलाओं का सामाजिक सशक्तिकरण होगा।
  • सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक लोगों तक पहुंचेगा।
  • स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ेगी।
  • डिजिटल सेवाओं का उपयोग बढ़ेगा।
  • वित्तीय समावेशन को मजबूती मिलेगी।
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नया आधार मिलेगा।

आगे क्या होगा?

पूर्ण साक्षर राज्य बनने के बाद अब उत्तराखंड सरकार का अगला लक्ष्य डिजिटल साक्षरता, कौशल विकास, आजीवन शिक्षा, वित्तीय जागरूकता तथा नई तकनीकों से प्रत्येक नागरिक को जोड़ना है।

इसके लिए विभिन्न विभागों के माध्यम से निरंतर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाने की योजना है, ताकि राज्य केवल साक्षर ही नहीं बल्कि तकनीकी रूप से भी सक्षम समाज का निर्माण कर सके।

उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण

उत्तराखंड की यह उपलब्धि केवल सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों नागरिकों की मेहनत, शिक्षकों के समर्पण, स्वयंसेवकों के अथक प्रयास और समाज की सकारात्मक भागीदारी का परिणाम है। शिक्षा किसी भी राज्य के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है और उत्तराखंड ने यह सिद्ध कर दिया है कि जनभागीदारी और मजबूत नीति के बल पर बड़े से बड़ा लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है।

देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बनकर उत्तराखंड ने न केवल अपनी पहचान मजबूत की है, बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है।