उत्तराखंड में मानसून का कहर: 9 और 10 जुलाई के लिए ऑरेंज अलर्ट, कई जिलों में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी, नदियां उफान पर और भूस्खलन का बढ़ा खतरा
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देहरादून। दैनिक प्रभातवाणी । 

उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर रौद्र रूप धारण कर लिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के कई जिलों के लिए 9 और 10 जुलाई को ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी दी है। लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक जनजीवन प्रभावित होने लगा है। प्रशासन ने सभी जिलों को अलर्ट मोड पर रखते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियां तेज कर दी हैं।

राज्य के विभिन्न हिस्सों में बीते 24 घंटों के दौरान लगातार बारिश दर्ज की गई है। पहाड़ी क्षेत्रों में कई स्थानों पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं, जबकि मैदानी जिलों में जलभराव की समस्या बढ़ने लगी है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे बेहद संवेदनशील बताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

इन सात जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधम सिंह नगर और चम्पावत जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में कहीं-कहीं मूसलाधार वर्षा, तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।

वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ सहित अन्य पर्वतीय जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज वर्षा हो सकती है। ऊंचाई वाले इलाकों में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है।

सामान्य से अधिक वर्षा ने बढ़ाई चिंता

राज्य में लगातार सक्रिय मानसून के कारण कई इलाकों में सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इससे छोटी-बड़ी नदियों, बरसाती नालों और गदेरों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं, जिससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले दो दिनों तक इसी प्रकार बारिश जारी रही तो कुछ क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है।

भूस्खलन की आशंका सबसे अधिक

लगातार हो रही बारिश के कारण पर्वतीय जिलों में मिट्टी पूरी तरह भीग चुकी है। इससे पहाड़ों के दरकने और चट्टानें गिरने की संभावना बढ़ गई है। संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन किसी भी समय सड़क संपर्क बाधित कर सकता है।

चारधाम यात्रा मार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। सीमा सड़क संगठन (BRO), लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की टीमें मशीनों के साथ तैयार रखी गई हैं ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके।

चारधाम यात्रा पर विशेष नजर

भारी बारिश को देखते हुए चारधाम यात्रा पर भी प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी अवश्य लें।

यदि किसी मार्ग पर भूस्खलन या सड़क अवरुद्ध होने की सूचना मिलती है तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने की व्यवस्था भी की गई है। यात्रा मार्गों पर पुलिस, एसडीआरएफ और जिला प्रशासन की टीमें तैनात हैं।

प्रशासन पूरी तरह अलर्ट

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राज्य आपदा प्रबंधन विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील गांवों और नदी किनारे के क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

जिलाधिकारियों को राहत एवं बचाव उपकरण, जेसीबी मशीनें, एंबुलेंस, राहत शिविर और आवश्यक खाद्य सामग्री तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

लोगों के लिए जारी की गई महत्वपूर्ण सलाह

मौसम विभाग और राज्य प्रशासन ने नागरिकों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं—

  • अनावश्यक यात्रा से पूरी तरह बचें, विशेषकर पहाड़ी मार्गों पर।
  • नदी, नालों, झरनों और पुलों के आसपास जाने से बचें।
  • तेज बारिश के दौरान पहाड़ों की ढलानों पर वाहन खड़ा न करें।
  • मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें।
  • बिजली कड़कने के दौरान खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर रहें।
  • मोबाइल फोन चार्ज रखें तथा टॉर्च, पीने का पानी और आवश्यक दवाइयां पहले से तैयार रखें।
  • आपात स्थिति में तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस या आपदा प्रबंधन विभाग से संपर्क करें।

अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो दिनों तक मानसून की सक्रियता बनी रह सकती है। यदि भारी बारिश का सिलसिला जारी रहा तो कई स्थानों पर जलभराव, भूस्खलन, सड़क अवरोध और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

राज्य सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल मौसम विभाग तथा प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। नागरिकों से सहयोग और सतर्कता बरतने का आग्रह किया गया है ताकि किसी भी संभावित आपदा से जनहानि को रोका जा सके।