Spread the loveउत्तराखंड में मॉनसून का रौद्र रूप: 24 घंटे में 12 की मौत, 172 सड़कें बंद, 5 जिलों में रेड अलर्ट – चारधाम यात्रा पर ब्रेकदेहरादून, 2 सितंबर। उत्तराखंड में मॉनसून ने एक बार फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। सितंबर महीने की शुरुआत होते ही पूरे पहाड़ में बादल फटने, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाओं ने तबाही मचा दी है। पिछले 24 घंटों के भीतर राज्य के अलग-अलग जिलों में हुए हादसों में 12 लोगों की जान चली गई है, जबकि दर्जनों लोग घायल और कई लापता बताए जा रहे हैं। दैनिक भास्कर, आजतक और इंडिया टीवी समेत प्रमुख मीडिया रिपोर्ट्स ने इस आंकड़े की पुष्टि की है।सबसे ज्यादा नुकसान अल्मोड़ा और देहरादून जिलों में हुआ है। अल्मोड़ा में मकान पर मलबा गिरने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, वहीं देहरादून के बालावाला और सहस्रधारा क्षेत्र में तेज बहाव में बहने और दीवार गिरने से 4 लोगों की मौत की खबर है। राज्य आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के मुताबिक मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है क्योंकि कई जगहों पर अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है।172 से अधिक सड़कें पूरी तरह ठप, यातायात बाधितलगातार हो रही मूसलाधार बारिश से पहाड़ दरक रहे हैं। पूरे उत्तराखंड में 172 से अधिक मुख्य और संपर्क सड़कें बंद हो गई हैं। इसमें नेशनल हाईवे भी शामिल हैं।देहरादून-मसूरी हाईवे पर कुठालगेट और कोल्हूखेत के पास भारी भूस्खलन से मार्ग 15 घंटे से बंद है।ऋषिकेश-बदरीनाथ NH-58 तोता घाटी और सिरोबगड़ में मलबा आने से बंद है, जिससे चारधाम यात्रा रोक दी गई है।यमुनोत्री और गंगोत्री हाईवे भी कई जगहों पर बाधित हैं।नैनीताल, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की लिंक रोड पूरी तरह टूट गई हैं।सैकड़ों यात्री और स्थानीय लोग रास्तों में फंसे हुए हैं। PWD और BRO की 250 से अधिक जेसीबी मशीनें सड़क खोलने में लगी हैं, लेकिन लगातार बारिश से काम में बाधा आ रही है। प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा न करने की अपील की है।नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के पार, नैनी झील 88 फीट पारपहाड़ों में हो रही भारी बारिश का असर मैदान और नदियों पर साफ दिख रहा है। राज्य की प्रमुख नदियां अलकनंदा, भागीरथी, पिंडर, मंदाकिनी, गौला और कोसी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। श्रीनगर में अलकनंदा का जलस्तर खतरे के निशान से 2 मीटर ऊपर पहुंच गया है।सबसे चिंताजनक स्थिति नैनीताल की है। यहां पिछले 24 घंटे में 217 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो इस सीजन की सबसे ज्यादा है। इससे प्रसिद्ध नैनी झील का जलस्तर 88 फीट पार कर गया है। झील के ओवरफ्लो होने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने उसके निकासी चैनलों को खोल दिया है, जिससे मल्लीताल और तल्लीताल के निचले इलाकों में पानी घुस गया है।टिहरी बांध और कालागढ़ बांध का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है, जिसके चलते प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है।5 जिलों में स्कूल बंद, IMD का रेड अलर्टभारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देहरादून ने अगले 48 घंटों के लिए चेतावनी जारी की है। देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, चंपावत और बागेश्वर में भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट, जबकि पौड़ी, टिहरी, चमोली और पिथौरागढ़ में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।IMD के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ के एक साथ सक्रिय होने से यह स्थिति बनी है। 3 और 4 सितंबर को भी भारी बारिश की संभावना है।रेड अलर्ट को देखते हुए इन 5 जिलों के जिलाधिकारियों ने सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों में 2 और 3 सितंबर को छुट्टी घोषित कर दी है। साथ ही ट्रैकिंग और पर्वतारोहण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।SDRF और NDRF का 24 घंटे रेस्क्यू ऑपरेशनमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा कंट्रोल रूम से हालात की समीक्षा की है और सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। SDRF, NDRF, ITBP और स्थानीय पुलिस की 40 से अधिक टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। हेलीकॉप्टर को भी स्टैंडबाय पर रखा गया है।प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर 1070 और 112 जारी किए हैं। लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, नदी-नालों से दूर रहें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन को सूचित करें। Post Views: 2 Post navigationDehradun में Swine Flu का Outbreak, 24 New Cases से हड़कंप ऋषिकेश में नाबालिग से Rape, 3 आरोपी गिरफ्तार, License रद्द