खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल, हल्द्वानी में कांग्रेस ने फूंका भाजपा का पुतला
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हल्द्वानी। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर हल्द्वानी की सियासत गरमा गई है। शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुद्ध पार्क में भाजपा सरकार और स्थानीय भाजपा नेताओं के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए भाजपा का पुतला दहन किया।

रामलीला मैदान के ‘शुद्धिकरण’ पर कांग्रेस नाराज

विवाद की शुरुआत 8 अगस्त को रामलीला मैदान में हुई मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुई। कांग्रेस का आरोप है कि रैली समाप्त होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े कुछ लोगों ने मैदान में गंगाजल का छिड़काव कर कथित रूप से शुद्धिकरण किया और यज्ञ-हवन कराया।

कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर भाजपा पर तीखा हमला बोला और कहा कि किसी राजनीतिक कार्यक्रम के बाद इस तरह मैदान को ‘शुद्ध’ करना सामाजिक भेदभाव और छुआछूत की मानसिकता को दर्शाता है।

‘दलित समाज का अपमान’ बता कांग्रेस ने किया विरोध

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मल्लिकार्जुन खड़गे देश के वरिष्ठ दलित नेताओं में शामिल हैं और उनकी रैली के बाद मैदान का कथित शुद्धिकरण किया जाना दलित समाज का अपमान है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि संविधान और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले समाज में जाति के आधार पर किसी व्यक्ति या कार्यक्रम को ‘अपवित्र’ बताने की मानसिकता स्वीकार नहीं की जा सकती।

बुद्ध पार्क में जमकर नारेबाजी, फूंका पुतला

विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बुद्ध पार्क में भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद भाजपा का पुतला दहन किया गया।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि सामाजिक समानता और सम्मान के मुद्दे पर पार्टी चुप नहीं बैठेगी। उन्होंने भाजपा से कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना पर अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की।

भाजपा के जवाब पर टिकी नजर

पूरे मामले में अब भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कांग्रेस के आरोपों के बाद भाजपा की ओर से यह स्पष्ट किया जाना बाकी है कि रामलीला मैदान में गंगाजल छिड़कने और हवन कराने के पीछे वास्तविक कारण क्या था और इसमें पार्टी कार्यकर्ताओं की क्या भूमिका थी।

राजनीतिक रूप से भी यह विवाद आने वाले दिनों में हल्द्वानी की सियासत को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि कांग्रेस ने इसे सामाजिक सम्मान, संविधान और समानता से जोड़ दिया है।

करारा सवाल

क्या किसी राजनीतिक रैली के बाद किसी सार्वजनिक स्थल का धार्मिक तरीके से ‘शुद्धिकरण’ करना केवल धार्मिक आस्था का विषय है, या इससे सामाजिक भेदभाव का संदेश भी जाता है? हल्द्वानी में छिड़े इस विवाद के बीच अब जनता की नजर भाजपा के आधिकारिक जवाब पर है।

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