जय श्री बदरीविशाल: जन्माष्टमी पर अलौकिक रूप में सजा बदरीनाथ धाम
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बद्रीनाथ धाम / चमोली। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान नारायण का दरबार भव्य रूप से सजाया गया है। रंग-बिरंगी रोशनी, फूल-मालाओं और विशेष सजावट से श्री बदरीनाथ धाम जगमगा उठा है। धाम की दिव्य आभा और अलौकिक नजारा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। शाम ढलते ही जब हजारों दीप और एलईडी लाइटें एक साथ जलती हैं तो ऐसा लगता है जैसे हिमालय की गोद में स्वर्ग उतर आया हो।

हजारों लाइटों से जगमगा रहा बदरीविशाल का दरबार

श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) द्वारा इस वर्ष जन्माष्टमी पर मंदिर को विशेष थीम पर सजाया गया है। मंदिर के मुख्य सिंहद्वार से लेकर गर्भगृह तक गेंदे और गुलाब के फूलों की मालाएं, मोर पंख और तुलसी की झालरें लगाई गई हैं। मंदिर के शिखर पर तिरंगे के रंग की लाइटें और पूरे परिसर में झिलमिलाती फेयरी लाइटें लगाई गई हैं।

मंदिर के मुख्य द्वार पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया है – “जय श्री बदरीविशाल – शुभ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं”। इसके साथ ही परिसर में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की झांकियां भी सजाई गई हैं।

भगवान बदरीनाथ और श्रीकृष्ण का गहरा संबंध

शास्त्रों के अनुसार भगवान बदरीनाथ भगवान विष्णु के ही अवतार हैं और श्रीकृष्ण भी विष्णु के आठवें अवतार हैं। इसलिए बदरीनाथ धाम में जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान नारायण स्वयं बालकृष्ण के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण बदरीनाथ धाम में जन्माष्टमी पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

रावल और धर्माधिकारी द्वारा सुबह से ही वेद मंत्रोच्चार के साथ भगवान का विशेष अभिषेक किया गया। दोपहर में भगवान को माखन-मिश्री और पंचामृत का भोग लगाया गया। शाम को भगवान की विशेष आरती और उसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ।

श्रद्धालुओं का लगा तांता, मौसम की चुनौती के बावजूद उत्साह

भारी बारिश के अलर्ट और खराब मौसम के बावजूद देशभर से हजारों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचे हैं। बदरीनाथ हाईवे पर जगह-जगह भूस्खलन के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। मंदिर समिति के अनुसार पिछले दो दिनों में ही 15 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने दर्शन किए हैं।

प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर में पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है।

रात का नजारा सबसे ज्यादा दिव्य

स्थानीय पुजारी बताते हैं कि जन्माष्टमी की रात का नजारा सबसे ज्यादा दिव्य होता है। जब अलकनंदा के किनारे बसे इस मंदिर में हजारों दीये जलते हैं और पीछे बर्फ से ढकी नीलकंठ पर्वत चोटी चांदनी में चमकती है, तो यह दृश्य जीवनभर याद रहता है। इस नजारे को देखने के लिए श्रद्धालु रात भर मंदिर परिसर में ही रुके रहते हैं।

BKTC का संदेश

मंदिर समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि इस बार मंदिर को 50 क्विंटल फूलों और 20 हजार एलईडी लाइटों से सजाया गया है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दी हैं।

 

कुल मिलाकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर बदरीनाथ धाम का यह भव्य रूप हर भक्त के मन को मोह रहा है। यदि आप भी इस पावन अवसर पर बदरीनाथ नहीं जा सके हैं, तो घर बैठे ही भगवान बदरीविशाल और बाल गोपाल का ध्यान कर पुण्य लाभ अर्जित कर सकते हैं।

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