देहरादून / उत्तराखंड: LUCC चिटफंड घोटाले में CBI की बड़ी कार्रवाई, 5 गिरफ्तार, मास्टरमाइंड विदेश फरार
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देहरादून, उत्तराखंड। राज्य के बहुचर्चित लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) चिटफंड घोटाले ने एक बार फिर पूरे उत्तराखंड में हलचल मचा दी है। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) ने देशभर में एक साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से देहरादून, मेरठ, नोएडा, लखनऊ और अन्य शहरों में एक साथ अंजाम दी गई, जिससे पूरे नेटवर्क में हड़कंप मच गया है।

यह मामला सिर्फ एक वित्तीय धोखाधड़ी नहीं बल्कि एक संगठित निवेश घोटाले के रूप में सामने आया है, जिसने उत्तराखंड के हजारों परिवारों की जीवनभर की बचत को प्रभावित किया है। खासतौर पर देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार, रुड़की, नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिलों में इसका सबसे अधिक असर देखा गया है।


देहरादून से शुरू हुआ नेटवर्क, कई राज्यों तक फैला जाल

जांच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे घोटाले का मुख्य केंद्र शुरुआती चरण में देहरादून और आसपास के इलाकों में सक्रिय था। यहां निवेशकों को आकर्षक योजनाओं के नाम पर भारी ब्याज और रकम दोगुनी करने का लालच दिया गया। धीरे-धीरे यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश, दिल्ली NCR और अन्य राज्यों तक फैल गया।

देहरादून में कई स्थानों पर सोसाइटी के ऑफिस खोले गए, जहां एजेंटों के जरिए आम लोगों से पैसा इकट्ठा किया गया। शुरुआती समय में निवेशकों को समय पर रिटर्न देकर भरोसा बनाया गया, जिससे लोगों ने बड़ी मात्रा में अपनी जमा पूंजी इस योजना में लगा दी।


गिरफ्तार आरोपी और देशव्यापी कार्रवाई

सीबीआई की इस बड़ी कार्रवाई में जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें सुशील गोखरू (कथित सरगना), राजेंद्र सिंह बिष्ट, तरुण कुमार मौर्य, गौरव रोहिल्ला और ममता भंडारी शामिल हैं।

इन सभी की गिरफ्तारी अलग-अलग स्थानों से की गई, जिनमें देहरादून, मेरठ और नोएडा प्रमुख हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह सभी आरोपी एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा थे, जो निवेशकों से पैसा इकट्ठा करने और उसे अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर करने में शामिल थे।


मास्टरमाइंड समीर अग्रवाल और पत्नी अब भी फरार

इस पूरे घोटाले का सबसे बड़ा नाम समीर अग्रवाल और उसकी पत्नी सानिया अग्रवाल बताया जा रहा है। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह दोनों इस पूरे नेटवर्क के वास्तविक संचालन और वित्तीय निर्णयों के केंद्र में थे।

फिलहाल दोनों आरोपी देश से बाहर फरार हैं और उनके संभावित ठिकाने विदेश, विशेषकर खाड़ी देश (Gulf region) बताए जा रहे हैं। इनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।


उत्तराखंड में 1 लाख से अधिक निवेशक प्रभावित

यह घोटाला उत्तराखंड में बहुत व्यापक स्तर पर फैला हुआ है। अनुमान के मुताबिक देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में करीब एक लाख से अधिक निवेशक इस योजना से प्रभावित हुए हैं।

लोगों को यह विश्वास दिलाया गया था कि उनकी राशि सुरक्षित निवेश में लगाई जा रही है और उन्हें निश्चित समय के बाद दोगुना रिटर्न मिलेगा। इसी भरोसे में हजारों परिवारों ने अपनी जीवनभर की बचत इस स्कीम में डाल दी।


800 करोड़ की जमा राशि और 400 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी

जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क ने अनियमित जमा योजनाओं (Unregulated Deposit Schemes) के तहत करीब ₹800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि इकट्ठा की। शुरुआती चरण में कुछ निवेशकों को आंशिक भुगतान किया गया, जिससे लोगों का भरोसा और बढ़ गया।

लेकिन बाद में अचानक भुगतान बंद कर दिया गया और कई कार्यालय बंद कर दिए गए। इसके बाद सामने आया कि वास्तविक धोखाधड़ी की राशि ₹400 करोड़ रुपये से अधिक है।


देहरादून, नोएडा और दिल्ली में संपत्तियों का खुलासा

जांच में यह भी सामने आया है कि निवेशकों के पैसों का उपयोग केवल भुगतान तक सीमित नहीं था, बल्कि इस धन से कई अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

इन संपत्तियों का बड़ा हिस्सा देहरादून, दिल्ली NCR, नोएडा और लखनऊ में स्थित है। इन संपत्तियों की पहचान कर ली गई है और अब इन्हें जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

सीबीआई ने इन सभी संपत्तियों का विस्तृत रिकॉर्ड उत्तराखंड सरकार के वित्त विभाग को सौंप दिया है ताकि आगे की कानूनी कार्रवाई तेज की जा सके।


BUDS Act 2019 के तहत कार्रवाई

यह पूरी कार्रवाई अनियमित जमा योजना पाबंदी अधिनियम (BUDS Act 2019) के तहत की जा रही है। इस कानून के तहत अवैध तरीके से जमा की गई राशि और उससे खरीदी गई संपत्तियों को कुर्क करने का प्रावधान है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संपत्तियों का सही मूल्यांकन और कुर्की प्रक्रिया समय पर पूरी होती है, तो पीड़ित निवेशकों को आंशिक राहत मिल सकती है।


नैनीताल हाईकोर्ट का अहम आदेश

इस पूरे मामले की शुरुआत उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज कई एफआईआर से हुई थी। लेकिन मामले की गंभीरता और बड़े पैमाने पर फैले नेटवर्क को देखते हुए नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Nainital High Court) ने वर्ष 2025 में इस जांच को सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

इसके बाद 26 नवंबर 2025 को देहरादून स्थित सीबीआई एसीबी शाखा में इस मामले को औपचारिक रूप से दर्ज किया गया और जांच को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार दिया गया।


देहरादून में निवेशकों का आक्रोश और हालात

देहरादून शहर और आसपास के इलाकों में इस घोटाले को लेकर लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। कई निवेशक लगातार कलेक्ट्रेट, पुलिस कार्यालय और बैंक शाखाओं के चक्कर काट रहे हैं।

ऋषिकेश और हरिद्वार में कई परिवारों ने बताया कि उन्होंने बच्चों की शिक्षा, शादी और भविष्य की योजनाओं के लिए रखी गई बचत इस स्कीम में लगा दी थी, जो अब पूरी तरह फंस गई है।


जांच का अगला चरण

सीबीआई अब इस पूरे मामले में डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक खातों और शेल कंपनियों की जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि धन को कई राज्यों और विदेशी चैनलों के माध्यम से घुमाया गया है।

जांच एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और इस घोटाले की और भी परतें सामने आएंगी।