देहरादून में बारिश ने खोली स्मार्ट सिटी की पोल, मुख्य सड़कें बनीं तालाब, ₹19 करोड़ की नई ड्रेनेज योजना पर उम्मीद
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देहरादून। दैनिक प्रभातवाणी ।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हुई मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर स्मार्ट सिटी परियोजना के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर की कई प्रमुख सड़कें और मैदानी इलाके घंटों तक जलमग्न रहे, जिससे आम लोगों, व्यापारियों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के बाद सामने आए हालात ने शहर के ड्रेनेज सिस्टम, शहरी नियोजन और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर नई बहस छेड़ दी।

प्रमुख इलाकों में घुटनों तक भरा पानी

बारिश के दौरान रायपुर रोड, करनपुर, बंजारावाला, प्रेम नगर, सहस्रधारा रोड, प्रिंस चौक, घंटाघर, सुभाष रोड और आराघर चौक सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन गई। कई स्थानों पर सड़कें तालाब जैसी दिखाई दीं और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि दून अस्पताल के सामने की सड़क और आधुनिक आईटी हब के रूप में विकसित हो रहा आईटी पार्क भी जलमग्न हो गया। इससे लोगों ने सवाल उठाया कि यदि स्मार्ट सिटी के महत्वपूर्ण क्षेत्र ही जलभराव से नहीं बच पा रहे हैं तो परियोजना के उद्देश्य कितने सफल रहे हैं।

ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित

जलभराव के कारण कई प्रमुख मार्गों पर यातायात घंटों तक प्रभावित रहा। दोपहिया वाहन पानी में बंद हो गए, कई चारपहिया वाहन फंस गए और लोगों को पैदल पानी के बीच से गुजरना पड़ा। कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, मरीजों और छात्रों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

आखिर क्यों हर साल बनती है यह स्थिति?

विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि जलभराव के पीछे कई कारण हैं—

  • स्मार्ट सिटी के तहत बने कई नालों में मलबा और कचरा जमा होने से पानी की निकासी बाधित हो जाती है।
  • शहर में तेजी से हुए कंक्रीटीकरण और इंटरलॉकिंग टाइल्स बिछाने से वर्षा का पानी जमीन में नहीं समा पाता।
  • वर्षों पुराना ड्रेनेज नेटवर्क वर्तमान आबादी और शहरी विस्तार के अनुरूप पर्याप्त नहीं रह गया है।
  • कई स्थानों पर निर्माण कार्यों के दौरान प्राकृतिक जल निकासी मार्ग भी प्रभावित हुए हैं।

प्रशासन ने शुरू की त्वरित कार्रवाई

स्थिति बिगड़ने के बाद नगर निगम की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को विभिन्न इलाकों में लगाया गया। जनरेटर पंपों की सहायता से जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने का कार्य किया गया और प्रभावित स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई।

₹19 करोड़ की नई ड्रेनेज परियोजना

बार-बार होने वाले जलभराव के स्थायी समाधान के लिए सरकार ने लगभग ₹19 करोड़ की लागत से नया ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की योजना बनाई है। प्रस्तावित योजना के तहत दर्शन लाल चौक से प्रिंस चौक होते हुए सहारनपुर चौक तक आधुनिक नाला बनाया जाएगा। यह परियोजना सिंचाई विभाग की देखरेख में प्रस्तावित है और इसकी फाइल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्वीकृति के लिए भेजी गई है।

यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो शहर के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम करने की उम्मीद की जा रही है।

जनता की अपेक्षा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल नई परियोजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है। नियमित रूप से नालों की सफाई, वैज्ञानिक ड्रेनेज प्लानिंग, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निगरानी और वर्षा जल निकासी की दीर्घकालिक व्यवस्था सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। हर मानसून में दोहराई जाने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान अब शहर की सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।