Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में जमीन से जुड़े विवाद और कथित फर्जीवाड़े के मामलों की समीक्षा के लिए गुरुवार, 24 सितंबर को देहरादून स्थित आयुक्त शिविर कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। गढ़वाल मंडल आयुक्त आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में हुई बैठक में गढ़वाल मंडल के विभिन्न जिलों से सामने आए 56 मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान 12 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि 8 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। एक मामले में SIT जांच के आदेश दिए गए हैं और शेष 35 मामलों में संबंधित अधिकारियों को अभिलेखों और तथ्यों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। बैठक में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि हस्तांतरण, अनधिकृत प्लॉटिंग तथा जमीन की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी से जुड़े मामलों पर अधिकारियों से जानकारी ली गई। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों की जांच प्रभावी और निष्पक्ष तरीके से की जाए तथा सरकारी भूमि पर कब्जे और अतिक्रमण से संबंधित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर देखा जाए। बैठक में हरिद्वार के बहादराबाद क्षेत्र में ग्राम सभा की भूमि पर खेती किए जाने की शिकायत का मामला भी सामने आया। आयुक्त ने यह पता लगाने के निर्देश दिए कि संबंधित भूमि पर खेती की अनुमति किस स्तर से दी गई और नियमानुसार फसल की कुर्की की कार्रवाई करने को कहा। कनखल के एक लैंड फ्रॉड मामले में संबंधित प्रॉपर्टी डीलर के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए। देहरादून के भारूवाला क्षेत्र में एंग्लो इंडियन एवं डोमिसाइल समिति की करीब 70 बीघा भूमि दूसरे व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित किए जाने का मामला भी समिति के सामने आया। आयुक्त ने संबंधित समिति के अधिनियम और बायलॉज का परीक्षण करने तथा भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। वहीं राजपुर रोड पर बहुउद्देशीय वित्तीय विकास निगम की भूमि से जुड़े मामले में नगर निगम को संपूर्ण अभिलेखों के साथ रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया। कोटद्वार-पौड़ी क्षेत्र में बिना अनुमति प्लॉटिंग और निर्धारित अंश से अधिक भूमि बेचे जाने के मामलों में भी जांच के निर्देश दिए गए। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लैंड फ्रॉड से जुड़े मामलों में केवल मौजूदा रिकॉर्ड के आधार पर निष्कर्ष न निकाला जाए। आवश्यकता पड़ने पर पुराने खसरा-खतौनी, नक्शे, रजिस्ट्री और अन्य राजस्व अभिलेखों का भी परीक्षण किया जाए, ताकि भूमि के स्वामित्व और हस्तांतरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। गढ़वाल मंडल में लैंड फ्रॉड मामलों की समीक्षा पहले भी होती रही है। मई 2026 में हुई एक बैठक में 125 मामलों की समीक्षा, 24 मामलों में FIR के निर्देश और 45 मामलों के निस्तारण की जानकारी सामने आई थी। इससे पहले जून 2025 में मंडल के सात जिलों से जुड़े 58 मामलों की समीक्षा की गई थी। रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAYAVANI Post Views: 7 Post navigation बैंक हड़ताल से पहले कर्मचारियों-पेंशनरों को मिलेगा सितंबर का वेतन, 26 सितंबर तक भुगतान के निर्देश अजीत डोभाल पर राहुल गांधी की टिप्पणी के विरोध में भाजपा, डोईवाला में प्रेस कॉन्फ्रेंस