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चमोली: लाटूधाम वाण से मां नंदा की देव डोलियां और छंतोलियां कैलास यात्रा के लिए रवाना हो गई हैं। शुक्रवार को देव डोलियां बेदनी कुंड पहुंचेंगी, जहां मां नंदा के स्नान, पूजा-अर्चना के साथ पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण की परंपरा निभाई जाएगी।

वाण गांव में देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा के धर्म भाई लाटू देवता की अगुवाई में देव डोलियां और छंतोलियां कैलास के लिए रवाना हुईं। मां नंदा की कैलास विदाई के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। विदाई के समय कई श्रद्धालु भावुक नजर आए और मां नंदा के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

मां नंदा की बड़ी जात के तहत दशोली और बंड की उत्सव डोलियां व छंतोलियां तथा बधाण की राजराजेश्वरी की लोकजात की उत्सव डोली भी कैलास के लिए रवाना हुई। हजारों श्रद्धालुओं के साथ देव डोलियां रात्रि प्रवास के लिए निर्जन पड़ाव गैरोलीपातल पहुंचीं। श्रद्धालुओं का हुजूम भी देव डोलियों के साथ कैलास यात्रा पर निकल पड़ा है।

शुक्रवार को देव डोलियां बेदनी कुंड पहुंचेंगी। यहां मां नंदा का स्नान कराया जाएगा। इसके बाद पूजा-अर्चना के साथ पितरों के निमित्त श्राद्ध और तर्पण की धार्मिक परंपरा निभाई जाएगी। इस दौरान बेदनी कुंड में आस्था, लोकविश्वास और हिमालयी प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।

मान्यता है कि कैलास जाते समय मां नंदा ने महिषासुर नामक राक्षस का वध कर उसे बेदनी कुंड में समाहित किया था। इसी मान्यता के चलते बेदनी कुंड नंदा भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है। कठिन और दुर्गम रास्तों को पार कर हजारों श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन के साक्षी बनने पहुंचते हैं।

पुजारी देवी दत्त कुनियाल के अनुसार बेदनी कुंड में पितृ तर्पण की परंपरा के माध्यम से लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं। स्नान, पूजा और तर्पण की धार्मिक क्रियाएं पूरी होने के बाद बधाण की नंदा की लोकजात यात्रा शुक्रवार को वापस बांक गांव लौटेगी। इसके बाद नंदा की देव डोली छह माह के प्रवास के लिए सिद्धपीठ देवराड़ा के गर्भगृह में विराजमान होगी।

वहीं, नंदा की बड़ी जात के तहत दशोली और बंड की उत्सव डोलियां उच्च हिमालय स्थित होमकुंड के लिए रवाना होंगी। बेदनी कुंड से होमकुंड तक का सफर कठिन और चुनौतीपूर्ण माना जाता है। होमकुंड पहुंचने के बाद चैसिंग्ये खाडुओं को कैलास के लिए विदा किया जाएगा। इसके बाद देव डोलियां सुतोल गांव लौटेंगी और सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचकर गर्भगृह में विराजमान होंगी।

रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAYAVANI