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हल्द्वानी। दैनिक प्रभातवाणी।
फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद पाया आग पर काबू, किसी के हताहत होने की सूचना नहीं, जांच शुरू

मंगलवार, 23 जून 2026 की शाम उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में स्थित केवीएम पब्लिक स्कूल में अचानक भीषण आग लगने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेजी से फैली कि स्कूल परिसर में खड़ी दो बसें और एक जनरेटर कुछ ही समय में पूरी तरह जलकर राख हो गए। आग की ऊंची लपटों ने देखते ही देखते स्कूल की मुख्य इमारत को भी अपनी चपेट में ले लिया, जिससे भवन के एक हिस्से को भारी नुकसान पहुंचा। घटना के समय स्कूल में नियमित कक्षाएं संचालित नहीं हो रही थीं, जिसके कारण एक बड़ा हादसा टल गया और किसी भी प्रकार की जनहानि नहीं हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शाम के समय स्कूल परिसर से अचानक धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ ही मिनटों में धुएं का गुबार घना हो गया और आग की लपटें तेजी से बसों तक पहुंच गईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग सबसे पहले स्कूल परिसर में खड़ी एक बस में लगी। इसके बाद आग ने दूसरी बस और पास में रखे जनरेटर को भी अपनी चपेट में ले लिया। जनरेटर में मौजूद ईंधन के कारण आग ने और अधिक विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे लपटें स्कूल भवन तक पहुंच गईं। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दूर-दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दे रहा था और आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बन गया।

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल स्कूल के आसपास का क्षेत्र खाली कराया और लोगों को सुरक्षित दूरी पर रहने की सलाह दी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करते हुए आसपास के मार्गों पर यातायात को भी कुछ समय के लिए नियंत्रित किया गया ताकि राहत एवं बचाव कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

दमकल कर्मियों ने कई घंटों तक लगातार पानी की बौछारें कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। आग की तीव्रता अधिक होने के कारण ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन संयुक्त प्रयासों के बाद आखिरकार आग पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया। इसके बाद फायर टीम ने यह सुनिश्चित किया कि कहीं दोबारा आग भड़कने की संभावना न रहे।

घटना की सूचना मिलते ही सिटी मजिस्ट्रेट ए. पी. वाजपेई सहित पुलिस और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और दमकल अधिकारियों से पूरी जानकारी ली। प्रशासन ने आग लगने के वास्तविक कारणों की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

आग से स्कूल की दो बसें पूरी तरह जलकर नष्ट हो गईं, जबकि जनरेटर भी पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इसके अलावा मुख्य भवन के जिस हिस्से तक आग पहुंची, वहां भी निर्माण सामग्री, विद्युत व्यवस्था और अन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचा है। फिलहाल प्रशासन नुकसान का विस्तृत आकलन कर रहा है।

सबसे राहत की बात यह रही कि इस पूरी घटना में किसी छात्र, शिक्षक, कर्मचारी या स्थानीय नागरिक के घायल होने अथवा जान गंवाने की कोई सूचना नहीं मिली है। यदि यह घटना स्कूल संचालन के समय होती तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। इस कारण प्रशासन और स्थानीय लोगों ने इसे एक बड़ा हादसा टलने के रूप में देखा है।

घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने भी प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति का जायजा लिया और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने की बात कही। अग्निशमन उपकरणों, विद्युत व्यवस्था और आपातकालीन सुरक्षा प्रणाली का निरीक्षण भी कराया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक संस्थानों में नियमित रूप से फायर सेफ्टी ऑडिट कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। बस पार्किंग क्षेत्र, जनरेटर कक्ष और विद्युत उपकरणों की समय-समय पर जांच होने से ऐसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। साथ ही स्कूलों में कर्मचारियों और छात्रों के लिए नियमित मॉक ड्रिल भी सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए।

फिलहाल पुलिस, फायर विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग लगने का वास्तविक कारण क्या था और क्या इस घटना में किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और यदि किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।