पौड़ी में प्रधानाचार्य नियुक्तियों पर उठे सवाल, बेरोजगार संगठन ने उच्च स्तरीय जांच की मांग, आंदोलन की चेतावनी
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पौड़ी। दैनिक प्रभातवाणी । 

 उत्तराखंड में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच अब पौड़ी जिले में प्रधानाचार्य पदों पर हुई नियुक्तियां विवादों में घिर गई हैं। बेरोजगार संगठनों ने नियुक्ति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि चयन के दौरान निर्धारित नियमों और मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। संगठन का कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष होती तो सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलता, लेकिन कई अभ्यर्थियों को कथित रूप से नियमों की अनदेखी कर लाभ पहुंचाया गया।

बेरोजगार संगठन के प्रतिनिधियों का आरोप है कि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव दिखाई देता है। उनका कहना है कि चयन सूची तैयार करने, मेरिट निर्धारण और अभ्यर्थियों के मूल्यांकन की प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई, जिससे युवाओं के बीच असंतोष बढ़ा है। संगठन ने मांग की है कि पूरी चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि किसी भी प्रकार के संदेह की स्थिति समाप्त हो सके।

संगठन के पदाधिकारियों ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आवश्यक हो तो विजिलेंस या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। उनका यह भी कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

बेरोजगार संगठनों का कहना है कि राज्य में युवाओं का भविष्य निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यदि नियुक्तियों में पारदर्शिता नहीं रहेगी तो योग्य अभ्यर्थियों का सरकारी व्यवस्था से विश्वास उठ सकता है। इसलिए सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र निर्णय लेना चाहिए।

संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों से विरोध दर्ज कराया जाएगा। उनका कहना है कि युवाओं के अधिकारों और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की रक्षा के लिए वे हर स्तर पर संघर्ष करने को तैयार हैं।

उधर, इस मामले को लेकर संबंधित विभाग या राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से किसी प्रकार की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि सरकार या विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो उसके आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

प्रधानाचार्य नियुक्तियों को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर उत्तराखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर बहस तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या जांच की मांग को स्वीकार किया जाता है या नहीं।

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