डोईवाला में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में किसानों का प्रदर्शन, छोटे किसानों के हितों की सुरक्षा की मांग
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देहरादून/डोईवाला। दैनिक प्रभातवाणी । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों की चिंताएं अब उत्तराखंड में भी खुलकर सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) के बैनर तले डोईवाला में किसानों ने प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने आशंका जताई कि यदि व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र को पर्याप्त सुरक्षा नहीं दी गई तो इसका सीधा असर छोटे और मध्यम किसानों की आजीविका पर पड़ सकता है।

प्रदर्शन में शामिल किसानों का कहना था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कुछ संभावित शर्तों से विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ सकता है। उनका दावा है कि यदि सस्ते कृषि उत्पाद बड़ी मात्रा में भारतीय बाजार में आते हैं, तो स्थानीय किसानों की उपज को उचित मूल्य मिलने में कठिनाई हो सकती है। इससे विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की आय प्रभावित होने की आशंका है।

स्थानीय कृषि पर संकट की आशंका

किसान नेताओं ने कहा कि उत्तराखंड सहित देश के अधिकांश किसान पहले से ही बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि विदेशी कृषि उत्पादों से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तो स्थानीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से घरेलू किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की।

केंद्र सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने केंद्र सरकार की आर्थिक और कृषि नीतियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली नीतियां छोटे किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। उन्होंने मांग की कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते से पहले किसान संगठनों से व्यापक चर्चा की जाए और उनकी राय को महत्व दिया जाए।

किसानों की प्रमुख मांगें

प्रदर्शनकारियों ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • कृषि उत्पादों के आयात से पहले घरेलू किसानों के हितों का आकलन किया जाए।
  • छोटे और सीमांत किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार सुरक्षा को मजबूत किया जाए।
  • कृषि क्षेत्र से जुड़े निर्णयों में किसान संगठनों से व्यापक परामर्श किया जाए।
  • ऐसी नीतियां लागू की जाएं जिनसे स्थानीय कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना रहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और निर्यात के नए अवसर पैदा करना है। सरकार यह भी कहती है कि कृषि सहित संवेदनशील क्षेत्रों के हितों का ध्यान रखते हुए ही किसी समझौते को अंतिम रूप दिया जाता है।

हालांकि किसान संगठनों का कहना है कि जब तक व्यापार समझौते की शर्तें पूरी तरह सार्वजनिक नहीं होतीं और किसानों की चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

नोट: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग राय है। प्रदर्शन में व्यक्त विचार संबंधित किसान संगठन के हैं, जबकि अंतिम निर्णय और शर्तें सरकार तथा दोनों देशों के बीच होने वाली आधिकारिक वार्ताओं पर निर्भर करेंगी।