बदरीनाथ धाम महा-दान घोटाला (Badrinath Temple Donation Scam) — CCTV फुटेज से खुली पोल, SIT ने की तीसरी गिरफ्तारी; मंदिर में ‘पॉकेटलेस’ ड्रेस कोड (Pocketless Dress Code) लागू
Spread the love
चमोली । उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध चारधामों में से एक, बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की आस्था और चढ़ावे के साथ खिलवाड़ का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मंदिर के हुंडी (दान) कक्ष में चढ़ावे की राशि और बहुमूल्य सामग्रियों की हेराफेरी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में विशेष जांच दल (SIT) की कार्रवाई अब और तेज हो गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त रुख के बाद, एसआईटी ने मामले में तीसरी बड़ी गिरफ्तारी की है। वहीं, बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने मंदिर की व्यवस्था और पारदर्शिता को बहाल करने के लिए ऐतिहासिक और कड़े प्रशासनिक बदलाव किए हैं [श्रोत]।

1. कैसे हुआ महा-घोटाले का भंडाफोड़? (CCTV ने खोली पोल)
यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब मंदिर प्रशासन को हुंडी (दानपात्र) और थाली भेंट की गिनती में विसंगतियां नजर आईं। इसके बाद जब काउंटिंग रूम के पिछले कई दिनों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले गए, तो वहां चल रहा काला खेल देखकर अधिकारी दंग रह गए। ड्यूटी पर तैनात बेहद जिम्मेदार पदों के लोग बड़ी चालाकी से नोटों की गड्डियां और सोने-चांदी के सिक्के गायब कर रहे थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए चमोली के पुलिस अधीक्षक (SP) के निर्देश पर एसआईटी प्रमुख महादेव उनियाल के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने जांच शुरू करते ही आरोपियों की धरपकड़ शुरू कर दी।

2. गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पूरी कुंडली
एसआईटी अब तक इस मामले में तीन लोगों को जेल भेज चुकी है, जिनके नाम और अपराध का तरीका इस प्रकार है:
    • प्रमोद नौटियाल (मुख्य आरोपी – पहली गिरफ्तारी): यह आरोपी बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष का पूर्व वैयक्तिक सहायक (PA) था। सीसीटीवी फुटेज में देखा गया कि यह नोटों की गिनती के बहाने अपने मोबाइल के नीचे नोटों के बंडल दबाता था और फिर उसे चुपके से अपनी जेबों में डाल लेता था [श्रोत]। इसके अलावा यह सोने-चांदी के सिक्के और बहुमूल्य केसर के पैकेट भी कपड़ों में छिपाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया [श्रोत]। इसे देहरादून से गिरफ्तार किया गया था।
    • राजेंद्र सिंह चौहान (दूसरी गिरफ्तारी): यह BKTC का सेवानिवृत्त मंदिर अधिकारी था। सेवाकाल खत्म होने के बाद भी इसे दान गणना (थाली भेंट काउंटिंग) कक्ष के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी। जांच में सामने आया कि इसने मुख्य आरोपी के साथ मिलकर पद का दुरुपयोग किया और गिनती के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी और दान सामग्री की हेराफेरी की [श्रोत]।
    • मनोज कुमार (तीसरी व नई गिरफ्तारी): एसआईटी ने हाल ही में मनोज कुमार को गिरफ्तार किया है, जो लामबगड़ स्थित जेपी कंपनी की जलविद्युत परियोजना में एक निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात था। यह आरोपी वीआईपी दर्शन (VIP Darshan) कराने के नाम पर मंदिर के भीतर साठगांठ कर अक्सर अपनी ड्यूटी लगवा लेता था। इसके बाद यह काउंटिंग रूम के आसपास सक्रिय रहकर कीमती सामान चुराता था और फिर उन सामग्रियों को अमीर तीर्थयात्रियों को ऊंचे दामों पर बेच देता था। पुलिस ने इसके फोन और कमरे की तलाशी लेकर चोरी की कई सामग्रियां बरामद की हैं [श्रोत]।


3. एसआईटी (SIT) की अब तक की बड़ी कार्रवाई
    • लाखों की नकदी और सोना-चांदी जब्त: पुलिस ने आरोपियों के घरों और ठिकानों पर छापेमारी कर चोरी किए गए लाखों रुपये कैश, भारी मात्रा में सोने और चांदी के सिक्के, और मंदिर के खजाने से चुराए गए असली केसर के पैकेट बरामद किए हैं [श्रोत]।
    • बैंक खाते किए गए फ्रीज: एसआईटी ने वित्तीय हेराफेरी के पुख्ता सबूत मिलने के बाद तीनों आरोपियों के सभी बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज (जब्त) कर दिया है, ताकि घोटाले की रकम को कहीं और ट्रांसफर न किया जा सके [श्रोत]।


4. भविष्य में चोरी रोकने के लिए प्रशासन के 4 ऐतिहासिक बदलाव
इस शर्मनाक घोटाले के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने मंदिर परिसर में सुरक्षा और पारदर्शिता का नया मॉडल लागू किया है:
    1. पॉकेटलेस ड्रेस कोड (Pocketless Dress Code): दान राशि और चढ़ावे की गिनती करने वाले कक्ष (Counting Room) में अब कोई भी कर्मचारी अपने निजी कपड़ों में नहीं बैठ सकेगा। उनके लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए बिना जेब (बिना पॉकेट) वाले कपड़े पहनना अनिवार्य कर दिया गया है [श्रोत]।
    2. ब्लाइंड स्पॉट का पूरी तरह खात्मा: मंदिर परिसर और विशेषकर परिक्रमा पथ के उन सभी कोनों (Blind Spots) की पहचान की गई है, जहां पहले कैमरे नहीं थे या विजिबिलिटी कम थी। अब उन सभी जगहों पर अत्याधुनिक हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरे लगा दिए गए हैं [श्रोत]।
    3. अनिवार्य ड्यूटी रोटेशन: काउंटिंग रूम में अब किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की स्थाई ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए हर कुछ दिनों में स्टाफ को लगातार रोटेट (बदला) किया जाएगा [श्रोत]।
    4. डिजिटल डोनेशन (Digital Push): मंदिर समिति अब श्रद्धालुओं को हुंडी या थाली में नकद पैसे डालने के बजाय परिसर में लगे आधिकारिक क्यूआर कोड (QR Code) और डिजिटल काउंटरों के माध्यम से सीधे बैंक खाते में ऑनलाइन दान करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है [श्रोत]।

धातु और नकदी के इस गबन मामले में सरकार ने स्पष्ट किया है कि आस्था के केंद्र में भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed