Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून ने 9 से 11 अगस्त 2026 तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के Alert के बाद पर्वतीय जिलों में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क अवरुद्ध होने, नदियों और बरसाती नालों के जलस्तर में अचानक वृद्धि तथा यातायात प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग ने विशेष रूप से बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली सहित कई जिलों में तेज बारिश की संभावना जताई है। इन क्षेत्रों में Orange और Yellow Alert को देखते हुए जिला प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। Orange-Yellow Alert के बीच पर्वतीय जिलों में बढ़ी निगरानी मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मानसून की सक्रियता के कारण उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश का दौर तेज हो सकता है। पर्वतीय क्षेत्रों में कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ अत्यधिक तेज बारिश की स्थिति बन सकती है। लगातार बारिश के कारण पहले से संवेदनशील पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा छोटे नदी-नालों में अचानक पानी बढ़ने से निचले इलाकों और सड़क मार्गों पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक रूप से पहाड़ी मार्गों पर यात्रा न करें और स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की Advisories का पालन करें। Disaster Management Department ने SDRF-NDRF को किया Alert भारी बारिश की संभावना को देखते हुए आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने जिला प्रशासन के साथ-साथ SDRF और NDRF की टीमों को भी पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के साथ ही संभावित आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य तत्काल शुरू करने की तैयारी रखने को कहा गया है। प्रशासन को ऐसे स्थानों की पहचान करने के निर्देश हैं, जहां भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, नदी का जलस्तर बढ़ने या सड़क संपर्क टूटने की आशंका अधिक रहती है। जरूरत पड़ने पर संवेदनशील क्षेत्रों में Loudspeaker Announcement के माध्यम से स्थानीय लोगों और यात्रियों को खतरे की जानकारी देने तथा सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा जाएगा। Badrinath Highway पर Helang के पास यातायात प्रभावित भारी बारिश का असर चारधाम यात्रा मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर हेलांग के पास भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। पर्वतीय मार्गों पर लगातार बारिश के दौरान पहाड़ से मलबा और पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में सड़क खोलने के लिए संबंधित विभागों की मशीनरी को मौके पर भेजा जाता है, लेकिन बारिश जारी रहने पर दोबारा मलबा आने का खतरा बना रहता है। यात्रियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कुछ स्थानों पर सड़क खुलने के बाद भी अचानक भूस्खलन के कारण Traffic फिर से रोकना पड़ सकता है। Gangotri और Yamunotri Highway पर भी खतरा गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी भूस्खलन के कारण यातायात प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। चारधाम यात्रा के दौरान इन मार्गों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आवाजाही करते हैं। बारिश के दौरान पहाड़ी सड़कों पर Visibility कम होने, सड़क पर मलबा आने और अचानक पत्थर गिरने से दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। प्रशासन और पुलिस की ओर से यात्रियों को सड़क की Latest स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही आगे बढ़ने की सलाह दी जा रही है। नदियों और बरसाती नालों पर भी निगरानी भारी बारिश के दौरान अलकनंदा, भागीरथी और मंदाकिनी जैसी प्रमुख नदियों के साथ-साथ छोटी नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ों में थोड़े समय में होने वाली अत्यधिक बारिश का असर नदी के जलस्तर पर तेजी से दिखाई दे सकता है। इसलिए प्रशासन की ओर से नदी किनारे रहने वाले लोगों और यात्रियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। नदी और गदेरे के किनारे Camping करने वाले पर्यटकों के लिए भी यह मौसम जोखिम भरा हो सकता है। अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का समय बहुत कम मिल सकता है। चारधाम यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण Advisory मौसम की स्थिति को देखते हुए चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित मार्ग की स्थिति, मौसम और स्थानीय प्रशासन की Advisory की जानकारी लेना जरूरी है। विशेष रूप से रात के समय भूस्खलन संभावित मार्गों पर यात्रा करने से बचना और सड़क पर मलबा दिखाई देने पर उसके पास वाहन खड़ा न करना सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती उत्तराखंड में इस समय मानसून के साथ-साथ धार्मिक यात्राओं और पर्यटन का भी दबाव है। चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक गतिविधियों के कारण पर्वतीय सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ी हुई है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती केवल सड़कें खोलने की नहीं है, बल्कि भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करना, समय पर Traffic रोकना और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना भी है। लोगों से अपील—Alert को हल्के में न लें प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से लें। नदी-नालों, गदेरों और भूस्खलन संभावित पहाड़ी ढलानों के पास जाने से बचें। अगर किसी मार्ग पर भूस्खलन के कारण Traffic रोक दिया जाता है तो जल्दबाजी में मलबे के ऊपर से वाहन निकालने की कोशिश न करें। सड़क खुलने और प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ना सुरक्षित है। Post Views: 2 Post navigation ₹16 करोड़ का पुल 16 दिन में सवालों के घेरे में: नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड 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