Spread the loveचमोली, 14 अगस्त 2026। उत्तराखंड के चमोली जिले के मायापुर-पीपलकोटी क्षेत्र में THDC के विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में गुरुवार शाम अचानक पानी और भारी मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे के समय सुरंग के भीतर कुल 22 मजदूर काम कर रहे थे। ताजा रिपोर्टों के अनुसार इनमें से 19 लोगों को बाहर निकाला जा चुका है, जबकि 7 मजदूरों की मौत हो गई है और 3 अभी भी लापता हैं। अचानक सुरंग में घुसा पानी और मलबा जानकारी के अनुसार मायापुर क्षेत्र में निर्माणाधीन टनल के करीब 1.50 किलोमीटर हिस्से में भूधंसाव/जमीन बैठने के बाद पानी, मिट्टी और मलबा तेजी से सुरंग के भीतर पहुंच गया। देखते ही देखते सुरंग का बड़ा हिस्सा मलबे और पानी से भर गया और वहां काम कर रहे मजदूरों के सामने जान बचाने का संकट पैदा हो गया। बताया गया है कि जिस सुरंग में हादसा हुआ, वह विष्णुगाड़-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है और इसकी लंबाई करीब 3 किलोमीटर बताई जा रही है। सुरंग में निर्माण कार्य के दौरान यह हादसा हुआ। 22 मजदूर थे अंदर, 7 की मौत हादसे के वक्त सुरंग में मौजूद 22 मजदूरों में से अधिकांश को बचाव दल ने बाहर निकाल लिया। हालांकि बाहर निकाले गए मजदूरों में से 7 को बचाया नहीं जा सका। तीन मजदूरों का अभी तक पता नहीं चल पाया है और उनकी तलाश लगातार जारी है। शुरुआती रिपोर्टों में मजदूरों की संख्या और सुरक्षित निकाले गए लोगों के आंकड़े अलग-अलग बताए गए थे। बाद की रिपोर्टों में 19 लोगों के बाहर निकाले जाने और 3 के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इसलिए फिलहाल यही आंकड़ा अधिक ताजा माना जा रहा है। सीने तक पानी और मलबे में रेस्क्यू रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर जमा पानी, कीचड़ और मलबा है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 80 बचावकर्मी अभियान में जुटे हैं। पानी बाहर निकालने के लिए कई पंप लगाए गए हैं और सुरंग के भीतर पहुंचने के लिए भारी मशीनरी तथा अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। बचावकर्मी पानी और मलबे के बीच बेहद मुश्किल परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। लापता मजदूरों तक पहुंचने के लिए सुरंग के प्रभावित हिस्से को लगातार साफ किया जा रहा है। NDRF, SDRF और अन्य एजेंसियां मैदान में हादसे की सूचना मिलते ही प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय बचाव दल समेत विभिन्न एजेंसियां मौके पर जुटी हैं। बचाव अभियान का मुख्य उद्देश्य तीनों लापता मजदूरों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है। लगातार बारिश और पहाड़ी क्षेत्र की संवेदनशील परिस्थितियों के कारण रेस्क्यू टीमों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया बचाए गए श्रमिकों को उपचार के लिए गोपेश्वर जिला अस्पताल ले जाया गया। रिपोर्टों के अनुसार कई मजदूर घायल हुए हैं और उनका इलाज चल रहा है। एक घायल की स्थिति गंभीर होने पर उसे उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए श्रीनगर बेस अस्पताल भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है। CM धामी ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी हादसे की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पहुंचे और Rescue Operation का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों और राहत-बचाव एजेंसियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली तथा लापता श्रमिकों को जल्द से जल्द खोजने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों से भी मुलाकात की और उनके उपचार की जानकारी ली। हादसे ने फिर उठाए सुरंग सुरक्षा पर सवाल चमोली जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में लगातार सुरंग निर्माण और जलविद्युत परियोजनाओं के दौरान होने वाली दुर्घटनाएं एक बार फिर Worker Safety और Geological Safety पर सवाल खड़े करती हैं। इस हादसे में पानी और मलबे के अचानक सुरंग में घुसने से मजदूरों को संभलने का पर्याप्त मौका नहीं मिला। अब हादसे के वास्तविक कारणों और निर्माण स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की विस्तृत जांच महत्वपूर्ण होगी। THDC की ओर से भी घटना के कारणों और परिस्थितियों का सक्षम एजेंसियों के साथ आकलन किए जाने की बात कही गई है। करारा सवाल आखिर निर्माणाधीन सुरंग में काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा के लिए क्या पर्याप्त इंतजाम थे? यदि पहाड़ी क्षेत्र में भूधंसाव और पानी के अचानक आने का खतरा था, तो क्या उससे निपटने के लिए पर्याप्त पूर्व चेतावनी और Emergency Exit व्यवस्था मौजूद थी? जांच में इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है। Rescue Operation पर टिकी निगाहें फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता तीन मजदूरों को खोज निकालना है। बचाव दल पानी और मलबे के बीच लगातार अभियान चला रहा है। हर गुजरते घंटे के साथ चुनौती बढ़ रही है, लेकिन रेस्क्यू टीमें पूरी ताकत से अभियान में जुटी हैं। चमोली की इस त्रासदी में 7 परिवारों ने अपने अपनों को खो दिया है, जबकि 3 परिवार अब भी अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं। पूरा उत्तराखंड अब Rescue Operation के सफल होने की प्रार्थना कर रहा है। Post Views: 2 Post navigation खड़गे की रैली के बाद ‘शुद्धिकरण’ पर बवाल, हल्द्वानी में कांग्रेस ने फूंका भाजपा का पुतला उत्तराखंड में अगले चार दिन भारी बारिश का अलर्ट, कई जिलों में Orange Alert