देहरादून में कांग्रेस का महंगाई के खिलाफ संग्राम: चीनी के दाम, E-20 पेट्रोल और जनता की जेब पर वार
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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज कांग्रेस ने एक बार फिर सड़कों पर उतरकर केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बढ़ती महंगाई, चीनी की आसमान छूती कीमतों और पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E-20) की अनिवार्यता के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा ईस्ट कैनाल रोड और डिस्पेंसरी रोड पर फूट पड़ा।

प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए पेट्रोल पंप पर पहुंचे। “महंगाई डायन खाय जात है” और “जनता की थाली से मिठास छीनना बंद करो” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन इतना उग्र हो गया कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और धस्माना सहित 100 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेजना पड़ा।

पहला मुद्दा – चीनी क्यों हुई 50 रुपये पार?

कांग्रेस का सबसे बड़ा आरोप चीनी की कीमतों को लेकर है। पिछले एक साल में खुदरा बाजार में चीनी का दाम 42 रुपये से बढ़कर 48-50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। कांग्रेस का तर्क है कि केंद्र सरकार की नई एथेनॉल नीति इसके लिए जिम्मेदार है।

सरकार ने गन्ने से एथेनॉल बनाने के लिए मिलों को ज्यादा प्रोत्साहन दिया है। पहले जो गन्ना चीनी बनाने में जाता था, अब उसका बड़ा हिस्सा एथेनॉल प्लांट में जा रहा है। नतीजा, बाजार में चीनी की सप्लाई घटी और दाम बढ़ गए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि त्योहारी सीजन से पहले ही घर का बजट बिगड़ गया है। आम आदमी की चाय की मिठास तक सरकार ने छीन ली है। उत्तराखंड में तो गन्ना किसान भी परेशान हैं, उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा और उपभोक्ता को महंगी चीनी मिल रही है।

दूसरा मुद्दा – E-20 पेट्रोल, राहत या आफत?

केंद्र सरकार ने 2025 तक पूरे देश में E-20 पेट्रोल लागू करने का लक्ष्य रखा था, यानी पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। सरकार का दावा है कि इससे प्रदूषण कम होगा, कच्चे तेल का आयात घटेगा और किसानों को फायदा होगा।

लेकिन कांग्रेस और आम वाहन चालकों का अनुभव कुछ और ही कह रहा है। धस्माना ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि सरकार बिना तैयारी के पुरानी गाड़ियों में E-20 ठूंस रही है। 2023 से पहले की बनी ज्यादातर दोपहिया और चारपहिया गाड़ियां E-10 के हिसाब से बनी हैं। 20% एथेनॉल से उनमें कई दिक्कतें आ रही हैं।

कांग्रेस ने तीन तकनीकी खामियां गिनाईं – पहला, एथेनॉल में पानी सोखने की क्षमता ज्यादा होती है जिससे इंजन के अंदर जंग लगता है। दूसरा, एथेनॉल की एनर्जी पेट्रोल से 33% कम होती है, इसलिए माइलेज 6 से 10% तक गिर जाता है। तीसरा, रबर और प्लास्टिक के पाइप एथेनॉल से जल्दी खराब होते हैं। देहरादून के कई मैकेनिकों ने भी माना है कि पिछले 6 महीनों में एवरेज और इंजन लीकेज की शिकायतें बढ़ी हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि सरकार माइलेज घटने के बावजूद पेट्रोल का दाम कम नहीं कर रही, यह जनता के साथ दोहरी लूट है।

तीसरा मुद्दा – महंगाई की पूरी तस्वीर

यह प्रदर्शन सिर्फ चीनी और पेट्रोल तक सीमित नहीं है। कांग्रेस ने महंगाई का पूरा कच्चा-चिट्ठा पेश किया। पार्टी के अनुसार 2014 के मुकाबले आज रसोई गैस सिलेंडर 150% महंगा हो गया है, सरसों का तेल 125% और आटा-दूध के दाम 80% तक बढ़ चुके हैं। देहरादून जैसे शहर में जहां पहले 500 रुपये में हफ्ते भर की सब्जी आ जाती थी, अब वही 800 रुपये में भी पूरी नहीं पड़ती।

पुलिस कार्रवाई और सियासी संदेश

आज सुबह करीब 11 बजे कांग्रेस कार्यकर्ता कांग्रेस भवन से जुलूस की शक्ल में निकले और ईस्ट कैनाल रोड स्थित पेट्रोल पंप पर धरने पर बैठ गए। इससे सड़क पर लंबा जाम लग गया। सूचना पर पहुंची धारा चौकी और कोतवाली पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन हंगामा बढ़ने पर सभी को हिरासत में ले लिया गया।

यह कोई पहला मौका नहीं है। इससे पहले भी देहरादून में एश्ले हॉल चौक, बल्लूपुर चौक, जीएमएस रोड और कैंट के पेट्रोल पंपों पर कांग्रेस इसी तरह प्रदर्शन कर चुकी है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार मुद्दा पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ चीनी और E-20 को भी जोड़ दिया गया है, ताकि सीधे घर की रसोई और बाइक की टंकी से जोड़ा जा सके।

कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने दाम वापस नहीं लिए तो यह आंदोलन देहरादून से निकलकर हर जिले के हर पेट्रोल पंप और हर चीनी मिल तक जाएगा। आने वाले नगर निकाय और 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस इसे बड़ा जन-मुद्दा बनाना चाहती है।

दूसरी तरफ भाजपा का कहना है कि एथेनॉल नीति से देश आत्मनिर्भर बन रहा है और महंगाई वैश्विक कारणों से है। अब देखना यह है कि इस सियासी खींचतान में आम जनता को राहत कब मिलती है।

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