Spread the loveडोईवाला, देहरादून। देहरादून जिले का प्रवेश द्वार कहे जाने वाला डोईवाला क्षेत्र एक बार फिर एक सकारात्मक और ऐतिहासिक पहल के कारण चर्चा में है। शिक्षा और स्वास्थ्य का हब बन चुके जौलीग्रांट स्थित हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (HIMS) के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग ने उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के साथ मिलकर युवाओं को नशे की दलदल से बचाने के लिए एक विशेष अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान को नाम दिया गया है – ‘EK-KOSHISH – नशे के विरुद्ध एक कोशिश’।पिछले कुछ महीनों में देहरादून, डोईवाला, रायवाला और ऋषिकेश ग्रामीण क्षेत्र में नशे की बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन से लेकर समाज तक सभी की चिंता बढ़ा दी है। इसी चिंता को दूर करने के लिए यह मुहिम एक डिजिटल हथियार के रूप में सामने आई है।क्या है ‘EK-KOSHISH’ मुहिम?प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मुहिम के तहत दो स्तर पर काम किया जा रहा है।पहला – जमीनी स्तर पर जागरूकता: HIMS जौलीग्रांट की मेडिकल टीम, जिसमें कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के डॉक्टर, काउंसलर और मेडिकल छात्र शामिल हैं, सीधे स्कूलों और कॉलेजों में जा रहे हैं। डोईवाला विकास खंड के दुधली इंटर कॉलेज, डोईवाला डिग्री कॉलेज, भानियावाला, रानीपोखरी और रायवाला के शिक्षण संस्थानों में विशेष काउंसलिंग शिविर लगाए जा रहे हैं। 29 अगस्त को ही डोईवाला डिग्री कॉलेज में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाया गया, जहां छात्रों ने नशे से दूर रहने की शपथ ली।दूसरा – डिजिटल स्तर पर 24 घंटे मदद: इस मुहिम की सबसे खास बात इसकी प्रस्तावित वेबसाइट है। टीम जल्द ही “EK-KOSHISH” नाम से एक पोर्टल लॉन्च करने जा रही है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी खूबी यह होगी कि कोई भी युवा, छात्र या उसके माता-पिता बिना अपनी पहचान उजागर किए, 24 घंटे किसी भी समय डॉक्टर से सलाह और काउंसलिंग ले सकेंगे। अक्सर देखा जाता है कि सामाजिक लोक-लाज के डर से युवा अपनी लत के बारे में खुलकर बात नहीं कर पाते, जिसके कारण लत गहरी होती जाती है। यह पोर्टल उस दीवार को तोड़ने का काम करेगा।क्यों पड़ी इस मुहिम की जरूरत?डोईवाला का क्षेत्र भौगोलिक रूप से बहुत बड़ा है। प्रशासनिक नजरिए से डोईवाला ब्लॉक के अंतर्गत लगभग 80 गांव आते हैं, जिसमें बालावाला, मियावाला, हर्रावाला, नकरौंदा, जौलीग्रांट, लच्छीवाला, भानियावाला, अठूरवाला, माजरी ग्रांट, मार्कहम ग्रांट, दूधली, रायवाला तक का पूरा क्षेत्र शामिल है। यह पूरा क्षेत्र देहरादून-ऋषिकेश नेशनल हाईवे-7 पर बसा है, जहां देहरादून का हवाई अड्डा भी है।इतने बड़े क्षेत्र में कई शिक्षण संस्थान हैं और युवाओं की बड़ी आबादी है। हाल के समय में नशे की चपेट में युवाओं के आने की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। इसे देखते हुए राज्य सरकार भी पूरी तरह से एक्शन में है।सरकार और पुलिस भी एक्शन में‘एक कोशिश’ मुहिम अकेली नहीं है, बल्कि यह राज्य के बड़े ‘ड्रग फ्री देवभूमि’ मिशन का हिस्सा बन गई है।पुलिस का ड्रग फ्री कैंपस अभियान: देहरादून पुलिस ने जिले के सभी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में ड्रग टेस्टिंग शुरू कर दी है। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि नशा करने वाले छात्रों और उसे बढ़ावा देने वाले संस्थानों पर कड़ी कार्रवाई होगी।पहला सरकारी नशा मुक्ति केंद्र: शासन ने रायवाला में राज्य के पहले 30 बेड वाले आधुनिक सरकारी नशा मुक्ति केंद्र के लिए 57 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। यह केंद्र भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार संचालित होगा।हेल्पलाइन जारी: नशे की सूचना देने के लिए शासन ने MANAS हेल्पलाइन 1933 और जिला नशा मुक्ति केंद्र की हेल्पलाइन 9625777399 को सक्रिय किया है, जिनके पोस्टर अब हर सरकारी कार्यालय और कॉलेज में लगाए जा रहे हैं।विशेषज्ञ क्या कहते हैं?कम्युनिटी मेडिसिन के विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सजा से नशे को रोका नहीं जा सकता, बल्कि सही समय पर सही काउंसलिंग और इलाज जरूरी है। नशा एक मानसिक और शारीरिक बीमारी है। युवा कई बार तनाव, पढ़ाई के दबाव या गलत संगत में पड़कर इसकी चपेट में आ जाते हैं। अगर उन्हें शुरुआत में ही सही मार्गदर्शन मिल जाए तो उन्हें बचाया जा सकता है। ‘EK-KOSHISH’ पोर्टल इसी गैप को भरने का काम करेगा।डोईवाला के लिए क्यों है ऐतिहासिक?डोईवाला हमेशा से ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र रहा है। यहां HIMS जैसा बड़ा मेडिकल संस्थान, देहरादून एयरपोर्ट और दर्जनों स्कूल-कॉलेज हैं। ऐसे में यहीं से इस तरह की डिजिटल पहल का शुरू होना पूरे उत्तराखंड के लिए एक मॉडल बन सकता है। यह पहल बताती है कि कैसे विज्ञान (UCOST) और चिकित्सा (HIMS) एक साथ मिलकर सामाजिक समस्या का समाधान निकाल सकते हैं।फिलहाल टीम वेबसाइट को अंतिम रूप देने में जुटी है और जल्द ही इसका लिंक और हेल्पलाइन नंबर सार्वजनिक किया जाएगा। यह निश्चित रूप से डोईवाला, देहरादून और ऋषिकेश क्षेत्र के युवाओं के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है। Post Views: 10 Post navigation Uttarakhand में Voluntary Chakbandi को लेकर ऐतिहासिक पहल, Gadul के ग्रामीणों ने दिखाई Unity