देहरादून / हल्द्वानी।  उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मध्य भारत में बने कम दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के असर से राज्य के पहाड़ी से लेकर मैदानी इलाकों तक मूसलाधार बारिश हो रही है। भारत मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून (IMD Dehradun) ने आज 3 सितंबर के लिए बड़ी चेतावनी जारी की है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार नैनीताल और अल्मोड़ा जिले के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, चम्पावत, ऊधम सिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश के साथ तेज गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है। पहाड़ से तराई तक जनजीवन अस्त-व्यस्त पिछले 24 से 48 घंटों से लगातार हो रही बारिश ने पूरे कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पर्वतीय इलाकों में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं और भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य भर में 152 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। अकेले कुमाऊं मंडल में कुल 95 सड़कें बंद बताई जा रही हैं। इनमें नैनीताल में 47 सड़कें (3 स्टेट हाईवे, 3 डिस्ट्रिक्ट रोड, 41 ग्रामीण रास्ते), पिथौरागढ़ में 21, अल्मोड़ा में 15, बागेश्वर में 11 और चम्पावत में 1 सड़क शामिल है। रणनीतिक रूप से अहम धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-गूंजी बॉर्डर रोड पर भी आवाजाही ठप हो गई है। हल्द्वानी में बारिश ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नैनीताल जिले में पिछले 24 घंटों में 89 मिमी की औसत बारिश हुई है, जबकि नैनीताल शहर में यह आंकड़ा 200 मिमी को पार कर गया है। कैंची धाम और मुक्तेश्वर में भी 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। गौला बैराज से 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है। अलकनंदा-गंगा से लेकर गौला-कोसी तक उफान राज्य की प्रमुख नदियां उफान पर हैं। अलकनंदा और गंगा नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। कुमाऊं में गौला, कोसी, शिप्रा, दाबका, नंधौर और कैलाश नदियां खतरे के निशान के पास बह रही हैं। गौला नदी के तेज बहाव के कारण बिंदुखत्ता, लालकुआं और शांतिपुरी में कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर कटान हो रहा है। कोसी नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है और प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। ऊधम सिंह नगर और तराई के इलाकों में खेतों में पानी घुस गया है। लालकुआं और शांतिपुरी के तराई क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की मुनादी गाड़ियां लगातार नदी किनारे बसी बस्तियों में सायरन बजाकर लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने की चेतावनी दे रही हैं। अल्मोड़ा और नैनीताल में सबसे ज्यादा मार अल्मोड़ा जिले में मूसलाधार बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। मौसम विभाग ने अल्मोड़ा के अलावा चौखुटिया, भिकियासैंण, रानीखेत, भनोली, द्वाराहाट और कटारमल जैसे प्रमुख कस्बों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। पहाड़ों से लगातार गिर रहे मलबे के कारण जिले की 15 सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क कट गया है। अल्मोड़ा शहर और आसपास के इलाकों में कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। प्राकृतिक आपदा और भारी बारिश के गंभीर खतरे को देखते हुए अल्मोड़ा जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने 3 सितंबर को जिले के सभी शासकीय, अशासकीय और निजी विद्यालयों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों और महाविद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छात्रों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। वहीं नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने को कहा गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान कुमाऊं मंडल में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों की दुखद मौत की खबर भी सामने आई है। देहरादून में भी हालात खराब, स्कूल बंद राजधानी देहरादून और उससे सटे विकासनगर क्षेत्र में भी हालात खराब हैं। कंडोली, बिधोली, प्रेमनगर, शुद्धोवाला, हरबर्टपुर और नवाबगढ़ के कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है। कई मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन जलभराव वाले क्षेत्रों में पंपिंग सेटों के जरिए पानी निकालने में जुटा है। इससे पहले 2 सितंबर को भी IMD ने नैनीताल और अल्मोड़ा में रेड अलर्ट और देहरादून, बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। तब देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर में कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए थे। आगे का पूर्वानुमान क्या कहता है? मौसम विभाग के अनुसार पूरे राज्य में 8 सितंबर तक मानसून सक्रिय रहेगा। 4 सितंबर को नैनीताल, चम्पावत, देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में भारी वर्षा की संभावना है। वहीं 5 और 6 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, बागेश्वर और चमोली में तीव्र बौछारें पड़ने का अनुमान है। प्रशासन ने चारधाम यात्रियों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें, नदी-नालों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत जिला कंट्रोल रूम से संपर्क करें। पर्यटकों को ऊंचाई वाले रास्तों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।
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देहरादून / हल्द्वानी।  उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। मध्य भारत में बने कम दबाव के क्षेत्र और उत्तर भारत में सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के असर से राज्य के पहाड़ी से लेकर मैदानी इलाकों तक मूसलाधार बारिश हो रही है। भारत मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून (IMD Dehradun) ने आज 3 सितंबर के लिए बड़ी चेतावनी जारी की है।

मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार नैनीताल और अल्मोड़ा जिले के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया है, जबकि देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, चम्पावत, ऊधम सिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भारी बारिश के साथ तेज गर्जना और आकाशीय बिजली चमकने की आशंका जताई गई है।

पहाड़ से तराई तक जनजीवन अस्त-व्यस्त

पिछले 24 से 48 घंटों से लगातार हो रही बारिश ने पूरे कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पर्वतीय इलाकों में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं और भूस्खलन की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।

प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार भारी बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य भर में 152 से अधिक सड़कें बंद हो गई हैं। अकेले कुमाऊं मंडल में कुल 95 सड़कें बंद बताई जा रही हैं। इनमें नैनीताल में 47 सड़कें (3 स्टेट हाईवे, 3 डिस्ट्रिक्ट रोड, 41 ग्रामीण रास्ते), पिथौरागढ़ में 21, अल्मोड़ा में 15, बागेश्वर में 11 और चम्पावत में 1 सड़क शामिल है। रणनीतिक रूप से अहम धारचूला-तवाघाट और तवाघाट-गूंजी बॉर्डर रोड पर भी आवाजाही ठप हो गई है।

हल्द्वानी में बारिश ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नैनीताल जिले में पिछले 24 घंटों में 89 मिमी की औसत बारिश हुई है, जबकि नैनीताल शहर में यह आंकड़ा 200 मिमी को पार कर गया है। कैंची धाम और मुक्तेश्वर में भी 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई है। गौला बैराज से 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है।

अलकनंदा-गंगा से लेकर गौला-कोसी तक उफान

राज्य की प्रमुख नदियां उफान पर हैं। अलकनंदा और गंगा नदियां खतरे के निशान के करीब पहुंच गई हैं। कुमाऊं में गौला, कोसी, शिप्रा, दाबका, नंधौर और कैलाश नदियां खतरे के निशान के पास बह रही हैं। गौला नदी के तेज बहाव के कारण बिंदुखत्ता, लालकुआं और शांतिपुरी में कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर कटान हो रहा है। कोसी नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ रहा है और प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है।

ऊधम सिंह नगर और तराई के इलाकों में खेतों में पानी घुस गया है। लालकुआं और शांतिपुरी के तराई क्षेत्र में फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की मुनादी गाड़ियां लगातार नदी किनारे बसी बस्तियों में सायरन बजाकर लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने की चेतावनी दे रही हैं।

अल्मोड़ा और नैनीताल में सबसे ज्यादा मार

अल्मोड़ा जिले में मूसलाधार बारिश का सिलसिला लगातार जारी है। मौसम विभाग ने अल्मोड़ा के अलावा चौखुटिया, भिकियासैंण, रानीखेत, भनोली, द्वाराहाट और कटारमल जैसे प्रमुख कस्बों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी है। पहाड़ों से लगातार गिर रहे मलबे के कारण जिले की 15 सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों का संपर्क कट गया है। अल्मोड़ा शहर और आसपास के इलाकों में कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।

प्राकृतिक आपदा और भारी बारिश के गंभीर खतरे को देखते हुए अल्मोड़ा जिलाधिकारी अंशुल सिंह ने 3 सितंबर को जिले के सभी शासकीय, अशासकीय और निजी विद्यालयों के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों और महाविद्यालयों में अवकाश घोषित कर दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छात्रों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा।

वहीं नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने को कहा गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान कुमाऊं मंडल में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में छह लोगों की दुखद मौत की खबर भी सामने आई है।

देहरादून में भी हालात खराब, स्कूल बंद

राजधानी देहरादून और उससे सटे विकासनगर क्षेत्र में भी हालात खराब हैं। कंडोली, बिधोली, प्रेमनगर, शुद्धोवाला, हरबर्टपुर और नवाबगढ़ के कई इलाकों में घरों में पानी घुस गया है। कई मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन जलभराव वाले क्षेत्रों में पंपिंग सेटों के जरिए पानी निकालने में जुटा है।

इससे पहले 2 सितंबर को भी IMD ने नैनीताल और अल्मोड़ा में रेड अलर्ट और देहरादून, बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। तब देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर में कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए थे।

आगे का पूर्वानुमान क्या कहता है?

मौसम विभाग के अनुसार पूरे राज्य में 8 सितंबर तक मानसून सक्रिय रहेगा। 4 सितंबर को नैनीताल, चम्पावत, देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर में भारी वर्षा की संभावना है। वहीं 5 और 6 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी, बागेश्वर और चमोली में तीव्र बौछारें पड़ने का अनुमान है।

प्रशासन ने चारधाम यात्रियों और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करें, नदी-नालों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत जिला कंट्रोल रूम से संपर्क करें। पर्यटकों को ऊंचाई वाले रास्तों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

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