Uttarakhand के दुर्गम Himalaya में Census 2027 का आगाज, 131 गांव
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देहरादून। देश की 16वीं जनगणना का सबसे कठिन और सबसे अहम पड़ाव उत्तराखंड में शुरू हो गया है। राज्य के उच्च हिमालयी और बर्फबारी वाले दुर्गम इलाकों में जनगणना 2027 के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत 1 सितंबर से हो चुकी है। इस विशेष अभियान के तहत राज्य के चार सीमांत जिलों के 131 हिमाच्छादित गांवों और तीन प्रमुख नगर पंचायत क्षेत्रों में घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना की जा रही है।

कौन से इलाके शामिल हैं?
जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड से मिली जानकारी के अनुसार, इस स्नो-बाउंड कैटेगरी में कुल 131 गांवों को चिन्हित किया गया है। जिलेवार आंकड़ा देखें तो चमोली जिले के 23 गांव, उत्तरकाशी के सबसे ज्यादा 69 गांव, पिथौरागढ़ के 35 गांव और रुद्रप्रयाग के 4 गांव इसमें शामिल हैं। इसके अलावा धार्मिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीन नगर पंचायत क्षेत्रों – बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री को भी इसी अभियान में जोड़ा गया है, जहां सर्दियों में आबादी न के बराबर रह जाती है।

182 कर्मियों की टीम विपरीत मौसम में तैनात
इस अभियान को आसान नहीं कहा जा सकता। समुद्र तल से 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई, टूटे रास्ते, भूस्खलन और हर घंटे बदलता मौसम – इन सबके बीच कुल 182 कर्मियों की टीम को तैनात किया गया है। इसमें 139 प्रगणक (Enumerators) जो घर-घर जाकर डेटा जुटा रहे हैं और 43 पर्यवेक्षक (Supervisors) जो पूरे काम की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, शामिल हैं। सभी कर्मियों को विशेष सैटेलाइट-लिंक्ड टैबलेट और ऐप के जरिए डेटा फीड करने की ट्रेनिंग दी गई है।

समय सारिणी और पहले शुरुआत की वजह
इस विशेष जनगणना की समय सारिणी आम जनगणना से अलग रखी गई है। इन इलाकों में 17 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक नागरिकों को ऑनलाइन स्व-गणना (Self-Enumeration) का मौका दिया गया था, ताकि जो लोग बाहर हैं वे खुद अपना विवरण भर सकें। इसके बाद 1 सितंबर 2026 से प्रगणकों ने फील्ड में उतरकर घर-घर जाकर गणना शुरू कर दी है। यह अभियान 30 सितंबर 2026 तक चलेगा।

इसकी बड़ी वजह भौगोलिक है। देश के बाकी हिस्सों में मुख्य जनगणना 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच होगी, जिसकी संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 है। लेकिन उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है। फरवरी में इन गांवों में 10 से 15 फीट तक बर्फ जमी होती है और अधिकांश ग्रामीण सर्दियों में नीचे घाटी के गांवों में पलायन कर जाते हैं, इसलिए सरकार ने सितंबर में ही गणना पूरी करने का फैसला लिया है।

इस बार की जनगणना क्यों है ऐतिहासिक?
यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक है। आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब जनगणना में जाति से जुड़ा सवाल भी शामिल किया गया है। यानी कास्ट सेंसस भी इसी के साथ होगा। प्रगणक हर परिवार से पहचान पत्रों, आवास, शिक्षा, रोजगार, पलायन और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े कुल 40 सवाल पूछ रहे हैं।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना कर्मियों का सहयोग करें, लेकिन साथ ही सतर्क भी रहें। जनगणना निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी प्रगणक कभी भी आपसे OTP, बैंक खाता नंबर, एटीएम पिन या किसी भी तरह की वित्तीय जानकारी नहीं मांगता है। अगर कोई ऐसा करता है तो वह फर्जी हो सकता है। सारा डेटा भारत सरकार के सुरक्षित सर्वर और आधिकारिक ऐप पर ही दर्ज किया जा रहा है।

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