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नई दिल्ली/देहरादून। वेद-वेदांत शोध संस्थान, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं संस्कृत भारती, दिल्ली प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को “वास्तु एवं पौरोहित्य” विषय पर विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. पंकज सेमल्टी ने मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय ज्ञान परंपरा में वास्तुशास्त्र एवं पौरोहित्य के महत्व, प्रासंगिकता और वर्तमान संदर्भों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में डॉ. सेमल्टी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में वास्तु एवं पौरोहित्य का महत्वपूर्ण स्थान है। वास्तुशास्त्र को केवल भवन निर्माण की दिशा और संरचना तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह मानव जीवन, प्रकृति, पर्यावरण और जीवन-पद्धति के बीच संतुलन स्थापित करने वाली भारतीय दृष्टि का महत्वपूर्ण पक्ष है। वहीं पौरोहित्य परंपरा संस्कारों, धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञीय परंपरा और सामाजिक जीवन को शास्त्रीय पद्धति से व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय मनीषियों ने वास्तु के माध्यम से प्रकृति के विभिन्न तत्वों के साथ मानव जीवन के सामंजस्य पर विशेष बल दिया। भवन निर्माण में दिशा, स्थान, प्रकाश, वायु तथा अन्य प्राकृतिक तत्वों के समुचित विन्यास का विचार भारतीय वास्तु परंपरा की प्रमुख विशेषता रहा है। इसी प्रकार पौरोहित्य के माध्यम से विभिन्न संस्कारों और धार्मिक अनुष्ठानों को विधिपूर्वक संपन्न कराने की परंपरा विकसित हुई।

डॉ. पंकज सेमल्टी ने गृहप्रवेश, वास्तुशांति, यज्ञ एवं विभिन्न संस्कारों के संदर्भ में वास्तुशास्त्रीय सिद्धांतों और पौरोहित्य कर्मकांड के पारस्परिक संबंधों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में इन विषयों पर प्रामाणिक शास्त्रीय आधार के साथ शोधपरक एवं अकादमिक अध्ययन को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी और शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के इन महत्वपूर्ण विषयों का गंभीरता से अध्ययन कर उन्हें समकालीन संदर्भों में प्रस्तुत करना चाहिए।

उल्लेखनीय है कि डॉ. पंकज सेमल्टी मूलरूप से उत्तराखंड के टिहरी जनपद के थन्यूल गांव के निवासी हैं। वर्तमान में वे गुरुग्राम के एक प्रतिष्ठित विद्यालय में संस्कृत विभागाध्यक्ष के पद पर कार्यरत हैं। इसके साथ ही वे संस्कृत आयाम, दिल्ली प्रान्त में सह-प्रान्त प्रमुख की भूमिका का भी निर्वहन कर रहे हैं। संस्कृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रचार-प्रसार तथा शैक्षणिक गतिविधियों में उनका सक्रिय योगदान रहा है।

कार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों, आचार्यों, शोधार्थियों एवं संस्कृत प्रेमियों ने डॉ. सेमल्टी के व्याख्यान को ज्ञानवर्धक एवं उपयोगी बताया। व्याख्यान के उपरांत विषय से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा भी हुई। इस दौरान विद्वत समुदाय ने वास्तु एवं पौरोहित्य जैसे पारंपरिक विषयों को शोध एवं अकादमिक विमर्श से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने डॉ. पंकज सेमल्टी को उत्तरीय एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया तथा उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े पदाधिकारी, विद्वान, आचार्य, शोधार्थी एवं संस्कृत अनुरागी उपस्थित रहे।

वेद-वेदांत शोध संस्थान, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं संस्कृत भारती दिल्ली प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और समकालीन संदर्भों में उसके अकादमिक अध्ययन की दिशा में एक सार्थक पहल के रूप में संपन्न हुआ।

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