ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में 41वां टनल ब्रेकथ्रू, 10.847 किमी लंबी एस्केप टनल-1 आर-पार
Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के निर्माण कार्य में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। 11 सितंबर को 10.847 किलोमीटर लंबी एस्केप टनल-1 का अंतिम ब्रेकथ्रू पूरा होने की जानकारी सामने आई। इसके साथ ही परियोजना में अब तक 41 टनल ब्रेकथ्रू होने का दावा किया गया है। हिमालय की चुनौतीपूर्ण भूगर्भीय परिस्थितियों के बीच हासिल की गई इस उपलब्धि से सुरंग निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना में 41वां टनल ब्रेकथ्रू, 10.847 किमी लंबी एस्केप टनल-1 आर-पार

125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन, पांच जिलों से होकर गुजरेगी

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना की कुल लंबाई 125 किलोमीटर है। यह रेल लाइन देहरादून, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों से होकर गुजरेगी। परियोजना का निर्माण रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) की देखरेख में किया जा रहा है। अनुमानित लागत करीब 37,000 करोड़ रुपये बताई गई है।

इस रेल मार्ग पर योग नगरी ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेलवे संपर्क स्थापित किया जाना है। परियोजना पूरी होने के बाद गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन और परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाने की उम्मीद है।

सुरंगों के निर्माण में बड़ी चुनौती

परियोजना में 16 मुख्य सुरंगों की कुल लंबाई लगभग 104 किलोमीटर और 12 एस्केप टनल की कुल लंबाई करीब 98 किलोमीटर बताई गई है। पहाड़ों की जटिल चट्टानों और गहरी घाटियों के कारण सुरंग निर्माण को इस परियोजना का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

एस्केप टनल-1 का निर्माण मेन बाउंड्री थ्रस्ट (MBT) के आसपास के संवेदनशील भूगर्भीय क्षेत्र में किया गया है। ऐसी परिस्थितियों में चट्टानों की संरचना, पहाड़ी दबाव और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। एस्केप टनल का उद्देश्य मुख्य रेल सुरंग में आपात स्थिति उत्पन्न होने पर सुरक्षित निकासी मार्ग उपलब्ध कराना है।

ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल संपर्क का इंतजार

परियोजना के सितंबर 2026 तक के उपलब्ध विवरण में 78 प्रतिशत से अधिक भौतिक कार्य पूरा होने की जानकारी दी गई है। निर्माण के अगले चरणों में ट्रैक बिछाने, विद्युत व्यवस्था और सिग्नलिंग से जुड़े काम आगे बढ़ाए जाने हैं। परियोजना को दिसंबर 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य बताया गया है।

रेल लाइन के तैयार होने के बाद ऋषिकेश से गढ़वाल के पर्वतीय क्षेत्रों तक यात्रा सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है। चारधाम यात्रा, स्थानीय व्यापार और पर्यटन के लिए भी यह रेल संपर्क महत्वपूर्ण माना जा रहा है।