ऋषिकेश PWD गेस्ट हाउस की जमीन पर कांग्रेस का विरोध, सरकार से मांगा जवाब
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ऋषिकेश। सरकारी जमीनों को निजी क्षेत्र को लीज पर देने की योजना को लेकर ऋषिकेश में कांग्रेस ने राज्य सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। कांग्रेस नेताओं ने PWD गेस्ट हाउस समेत अन्य सरकारी संपत्तियों को लेकर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। नेताओं का कहना है कि सरकारी जमीनों से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

PWD गेस्ट हाउस की जमीन को लेकर उठे सवाल

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, ऋषिकेश का PWD गेस्ट हाउस करीब साढ़े 13 बीघा जमीन पर बना है। पार्टी ने इसकी बाजार कीमत लगभग 500 करोड़ रुपये होने का दावा किया है। कांग्रेस का आरोप है कि उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंवेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (UIIDB) के माध्यम से इस संपत्ति को निजी क्षेत्र को लंबे समय की लीज पर देने की तैयारी की जा रही है।

कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि गेस्ट हाउस की जमीन को लीज पर देने का निर्णय किस आधार पर लिया गया है और इससे सरकारी संपत्ति के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा। पार्टी ने इस प्रक्रिया को रोकने की मांग की है।

स्थानीय व्यापारियों के पुनर्वास का मुद्दा

कांग्रेस नेताओं ने सड़क चौड़ीकरण के दौरान हटाए गए स्थानीय दुकानदारों के पुनर्वास का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि वर्षों से कारोबार कर रहे व्यापारियों को हटाने के बाद उनके पुनर्वास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई। अब उसी क्षेत्र की जमीन को निजी हाथों में देने की तैयारी से स्थानीय लोगों की चिंताएं बढ़ी हैं।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयेंद्र रमोला और ललित मोहन मिश्रा ने कहा कि उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन से जुड़े फैसलों में जनहित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने सरकारी संपत्तियों के व्यवसायीकरण पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा।

अन्य सरकारी संपत्तियों पर भी कांग्रेस की नजर

कांग्रेस ने नैनीताल के पटुआडांगर की 14 एकड़ भूमि, हरिद्वार के अलकनंदा होटल और PWD के 25 निरीक्षण बंगलों को लीज पर देने की योजना का भी विरोध किया है। पार्टी ने मांग की है कि इन संपत्तियों से जुड़े प्रस्तावों, लीज की अवधि और चयन प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए।

सरकार से निर्णय स्पष्ट करने की मांग

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार को सरकारी जमीनों के संबंध में अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो ऋषिकेश से आंदोलन शुरू किया जाएगा और इसे पूरे उत्तराखंड में ले जाया जाएगा।

सरकारी संपत्तियों के भविष्य को लेकर उठे सवालों के बीच अब सरकार के आधिकारिक जवाब और UIIDB की प्रस्तावित प्रक्रिया की जानकारी का इंतजार है।

रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAVANI