चमोली में बारिश बनी आफत: किमाणा गांव में पहाड़ी से भारी भूस्खलन, घरों में घुसा मलबा; 20 परिवार प्रभावित, मंदिर भी क्षतिग्रस्त
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चमोली। दैनिक प्रभातवाणी।

उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश अब पहाड़ी क्षेत्रों में गंभीर आपदा का रूप लेती जा रही है। चमोली जिले के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) विकासखंड के किमाणा गांव में शुक्रवार को भारी भूस्खलन से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। गांव के ऊपर स्थित पहाड़ी का बड़ा हिस्सा अचानक दरक गया, जिसके बाद भारी मात्रा में कीचड़, मलबा और विशाल बोल्डर रिहायशी क्षेत्र में आ गिरे। इस घटना से गांव में अफरा-तफरी मच गई और लोगों को अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर निकलना पड़ा।

लगातार कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण पहाड़ी की मिट्टी पूरी तरह पानी से संतृप्त हो चुकी थी। इसी दौरान पहाड़ी का हिस्सा टूटकर नीचे आ गया और मलबे का तेज बहाव सीधे गांव तक पहुंच गया। देखते ही देखते कई मकानों के आंगन और कमरों में कीचड़ व पत्थर भर गए। कई परिवारों की घरेलू सामग्री मलबे में दब गई, जबकि खेतों में खड़ी नकदी फसलें भी पूरी तरह बर्बाद हो गईं।

करीब 20 परिवारों के घर और खेती प्रभावित

भूस्खलन से गांव के लगभग 20 परिवार सीधे प्रभावित हुए हैं। कई मकानों की दीवारों में दरारें आ गई हैं, जबकि कुछ मकानों में इतना अधिक मलबा भर गया कि वहां रहना असुरक्षित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई खेती कुछ ही मिनटों में मलबे में दब गई। इससे प्रभावित परिवारों के सामने आजीविका का भी संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय मंदिर को भी भारी नुकसान

भूस्खलन की चपेट में गांव का प्राचीन स्थानीय मंदिर भी आ गया। मंदिर की भोग मंडी (प्रसाद कक्ष) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि उसकी सुरक्षा दीवार भी मलबे के दबाव से ढह गई। ग्रामीणों ने इसे गांव के लिए अत्यंत दुखद घटना बताया और मंदिर के पुनर्निर्माण की मांग की है।

राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभावित परिवारों को उनके घरों से सुरक्षित निकालकर स्थानीय सरकारी स्कूलों और सामुदायिक भवनों में अस्थायी रूप से ठहराया है।

राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल, दवाइयों और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रशासन लगातार गांव की निगरानी कर रहा है क्योंकि बारिश अभी भी जारी है और भूस्खलन का खतरा पूरी तरह टला नहीं है।

जनहानि नहीं, लेकिन आर्थिक नुकसान भारी

इस आपदा में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, जिसे प्रशासन और ग्रामीण बड़ी राहत मान रहे हैं। हालांकि मकानों, कृषि भूमि, घरेलू सामान और पशुधन से जुड़े संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचा है। राजस्व विभाग की टीम प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर नुकसान का विस्तृत आकलन तैयार कर रही है, जिसके आधार पर प्रभावित परिवारों को सरकारी सहायता और मुआवजा दिया जाएगा।

मंडलायुक्त ने दिए सख्त निर्देश

गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप ने जिला प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि गाड़-गदेरों, नदियों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों पर विशेष नजर रखी जाए। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर अन्य संवेदनशील गांवों को भी समय रहते सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री, भोजन, सुरक्षित आवास और सरकारी मुआवजा समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाए ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मौसम विभाग की चेतावनी से बढ़ी चिंता

मौसम विभाग ने उत्तराखंड के कई पर्वतीय जिलों में आगामी दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके चलते भूस्खलन, चट्टान गिरने, नदियों और गाड़-गदेरों के उफान पर आने का खतरा बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन करने की अपील की है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

लगातार सक्रिय मानसून को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखें, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन या आपदा नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें। राज्य के पर्वतीय इलाकों में लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी लगातार की जा रही है।