Spread the love रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के प्रसिद्ध पंचकेदार धामों में शामिल तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने के साथ ही शीतकालीन पूजा की परंपरा शुरू हो गई है। अब भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां आगामी शीतकाल में श्रद्धालु भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर विश्व के सबसे ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिरों में गिना जाता है। सर्दियों में अत्यधिक बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण यहां नियमित पूजा संभव नहीं रहती। इसी वजह से परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट बंद होने के बाद भगवान की उत्सव डोली को शीतकालीन पूजा स्थल पर लाया जाता है। 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी उत्सव डोली निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवान तुंगनाथ की उत्सव डोली 6 नवंबर को चोपता में रात्रि विश्राम करेगी। इसके बाद 7 नवंबर को भनकुंड पहुंचेगी और 8 नवंबर को मक्कूमठ स्थित श्री मर्कटेश्वर मंदिर में विराजमान होगी। डोली के आगमन के बाद यहां शीतकालीन पूजा-अर्चना विधिवत शुरू होगी। 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है तुंगनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 3,680 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भगवान तुंगनाथ का मंदिर पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यहां भगवान शिव की भुजाओं की पूजा की जाती है। हिमालय की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित इस धाम में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर को लगभग आठ कुंतल फूलों से सजाया गया था। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुई कपाट बंद होने की प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा तुंगनाथ के जयकारे लगाए। शीतकाल में भी जारी रहेंगे बाबा के दर्शन तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने का अर्थ यह नहीं है कि श्रद्धालु शीतकाल में भगवान के दर्शन नहीं कर सकेंगे। परंपरा के अनुसार शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ में भगवान की पूजा-अर्चना जारी रहेगी। इससे स्थानीय धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ शीतकाल में भी श्रद्धालुओं को दर्शन का अवसर मिलेगा। तुंगनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही उत्तराखंड के अन्य उच्च हिमालयी धामों में भी शीतकालीन प्रवास की तैयारियां तेज हो गई हैं। अब श्रद्धालुओं की निगाहें केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री सहित पंचकेदार के अन्य मंदिरों की कपाट बंद होने की प्रक्रिया और शीतकालीन पूजा स्थलों पर रहेंगी। रिपोर्ट: अजय सेमल्टी | HIMALAYAVANI Post Views: 3 Post navigation उत्तराखंड के लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, लोक संस्कृति में योगदान के लिए मिला सम्मान धामी सरकार का कर्मचारियों को दिवाली तोहफा, DA 3% बढ़ा; 4 महीने का एरियर भी मिलेगा