Spread the loveदेहरादून। उत्तराखंड की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता हरीश रावत ने पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस बात की जानकारी दी है। हालांकि उन्होंने ये भी साफ किया है कि वो कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस उनकी रगों में बसी हुई है। क्या है पूरा मामला? दरअसल, ये पूरा घटनाक्रम प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एक बड़ी कार्रवाई के बाद हुआ है। गुरुवार को ED की टीम ने हरीश रावत के बेहद करीबी माने जाने वाले चंदन सिंह जीना के देहरादून स्थित ठिकानों पर छापा मारा था। चंदन सिंह जीना हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके OSD की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और फिलहाल उनके निजी सहायक (PA) के तौर पर काम कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, ED की इस छापेमारी के दौरान उनके घर से बड़ी मात्रा में संपत्ति बरामद हुई है। इसमें 32 लाख रुपये नकद, 200 ग्राम से ज्यादा सोने के सिक्के और चेन, और 12 महंगी ब्रांडेड घड़ियां शामिल हैं। जांच एजेंसी ने उनके कुछ बैंक खातों को भी सीज किया है। बताया जा रहा है कि ये जांच 2016 में हुए UKSSSC ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती मामले में गड़बड़ी और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है। हरीश रावत ने क्यों दिया इस्तीफा? छापेमारी की खबर सामने आने के बाद हरीश रावत ने शुक्रवार देर शाम सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा कि उन्हें इस घटना से गहरा दुख और लज्जा महसूस हो रही है। रावत ने अपने पोस्ट में दो अहम बातें कही हैं: 1. उन्होंने उत्तराखंड कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी सदस्य और दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की पेशकश की है। 2. उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि उनके किसी सहयोगी की वजह से कांग्रेस पार्टी, खासकर राहुल गांधी की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई पर कोई सवाल खड़ा हो। इसके साथ ही उन्होंने इस कार्रवाई के समय पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जब उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, तब इस तरह की कार्रवाई की टाइमिंग पर सवाल उठना लाजमी है। फिलहाल कांग्रेस हाईकमान की तरफ से उनके इस्तीफे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। Post Views: 38 Post navigation Badrinath Dham Tragedy: तप्त कुंड में डूबने से दो सगी बहनों की मौत Seva Sankalp Abhiyan: 17 सितंबर से उत्तराखंड में शुरू होगा अभियान