स्थानीय अवकाश: मौसम के रेड और ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए जिलाधिकारियों (DM) को परिस्थितियों के अनुसार कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों और आंगनबाड़ियों में स्थानीय स्तर पर छुट्टी घोषित करने के निर्देश दिए गए हैं।सीएम धामी की सख्त हिदायत: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी जिलाधिकारियों को आपदा प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह अलर्ट रखने और अपने फोन हमेशा चालू रखने के निर्देश दिए हैं। मानसून खत्म होते ही राज्य की क्षतिग्रस्त सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना भी तैयार की गई है
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देहरादून। उत्तराखंड में मानसून के तेवर लगातार तल्ख बने हुए हैं। मौसम विभाग की ओर से भारी बारिश के अलर्ट के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा करते हुए सभी जिलाधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तत्काल निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनहानि को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

हाल के दिनों में भारी बारिश के चलते कई जिलों में कक्षा 1 से 12 तक के स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। देहरादून समेत कुछ जिलों में प्रशासन ने मौसम की स्थिति और IMD चेतावनी को देखते हुए छुट्टी घोषित की है।

 स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर स्कूल बंद करने का अधिकार

मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मौसम विभाग की चेतावनी के साथ-साथ अपने जिले की स्थानीय भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों का आकलन करें। जहां भारी बारिश, भूस्खलन, जलभराव, नदी-नालों के उफान या सड़क बाधित होने से बच्चों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है, वहां कक्षा 1 से 12 तक के विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में छुट्टी घोषित की जाए।

इसका मतलब यह है कि पूरे प्रदेश में एक समान छुट्टी जरूरी नहीं है। किसी जिले में छुट्टी का निर्णय वहां के जिलाधिकारी की ओर से स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लिया जा सकता है।

 24 घंटे फोन ऑन रखें DM

मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन 24 घंटे चालू रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रतिक्रिया देने को कहा गया है।

जिला आपदा नियंत्रण केंद्रों को भी पूरी क्षमता के साथ सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी घटना की सूचना मिलने पर राहत और बचाव कार्य में देरी न हो।

नदियों और संवेदनशील क्षेत्रों पर पैनी नजर

भारी बारिश के दौरान नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने, भूस्खलन और सड़क धंसने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेष रूप से नदियों के किनारे, बरसाती नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी ढलानों पर निगरानी बढ़ाने को कहा गया है। SDRF और NDRF समेत आपदा राहत से जुड़ी एजेंसियों को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

 बारिश से बंद सड़कों को तत्काल खोलने पर जोर

मुख्यमंत्री ने बारिश और भूस्खलन के कारण बंद होने वाले मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश भी दिए हैं। सड़क बंद होने की स्थिति में जेसीबी, पोकलैंड और अन्य आवश्यक मशीनरी को तत्काल मौके पर पहुंचाकर यातायात बहाल करने पर जोर दिया गया है।

मानसून समाप्त होने के बाद प्रदेश की क्षतिग्रस्त सड़कों को दुरुस्त करने और गड्ढामुक्त करने के लिए विशेष कार्ययोजना पर भी जोर दिया गया है।

 पर्यटकों और आम लोगों से सावधानी की अपील

प्रशासन ने लोगों से खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान अचानक भूस्खलन और सड़क बाधित होने की घटनाएं सामने आ सकती हैं।

लोगों को उफनती नदियों, गदेरे-नालों, जलभराव वाले क्षेत्रों और कमजोर पहाड़ी ढलानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भी मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करने की अपील की गई है।

 छुट्टी की सूचना के लिए DM के आदेश पर रखें नजर

बारिश के दौरान स्कूल बंद करने का फैसला जिला स्तर पर परिस्थितियों के अनुसार लिया जा रहा है। इसलिए अभिभावकों और विद्यार्थियों को अपने जिले के जिलाधिकारी, जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के आधिकारिक आदेश पर नजर रखनी चाहिए।

हाल के दिनों में देहरादून, चमोली और बागेश्वर जैसे जिलों में भारी बारिश के अलर्ट के बीच स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र बंद किए जाने के आदेश जारी हुए हैं।

करारा सवाल: मौसम बिगड़ने के बाद नहीं, पहले क्यों जरूरी है तैयारी?

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में मानसून के दौरान मौसम तेजी से बदलता है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल सड़कें खोलना या राहत पहुंचाना नहीं, बल्कि संभावित खतरे वाले क्षेत्रों में समय रहते लोगों को सुरक्षित करना है। मुख्यमंत्री के निर्देशों का मूल उद्देश्य भी यही है कि मौसम की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन पहले से तैयारी रखे और जरूरत पड़ने पर स्कूलों, आंगनबाड़ियों तथा अन्य संवेदनशील गतिविधियों को तत्काल रोक सके।

नोट: स्कूल बंदी का अंतिम निर्णय संबंधित जिले के जिलाधिकारी के आदेश पर निर्भर करता है; इसलिए किसी जिले के लिए छुट्टी की पुष्टि उसके आधिकारिक DM/जिला प्रशासन आदेश से ही करें।

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