Spread the love देहरादून | दैनिक प्रभातवाणी । उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर बेहद सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पूरे प्रदेश में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य के आठ जिलों के लिए अत्यधिक भारी बारिश और फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) की चेतावनी जारी करते हुए प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 घंटे प्रदेश के कई हिस्सों के लिए बेहद संवेदनशील हैं और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने तथा नदी-नालों के उफान पर आने की आशंका बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, पौड़ी गढ़वाल, बागेश्वर, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों में अत्यधिक भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। जिला प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पुलिस की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं। नदियां उफान पर, बढ़ा खतरा लगातार बारिश के कारण रुद्रप्रयाग जिले में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंच गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने नदियों के आसपास आवाजाही से बचने की अपील की है। पर्वतीय क्षेत्रों में छोटे-छोटे गदेरे और बरसाती नाले भी उफान पर हैं, जिससे अचानक बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हेल्पलाइन नंबर जारी राज्य सरकार ने किसी भी आपदा या आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए 1070 (राज्य आपदा नियंत्रण कक्ष) और 112 (आपातकालीन सेवा) हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। जिला नियंत्रण कक्षों को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है और सभी अधिकारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं। स्कूलों में अवकाश भारी बारिश और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में कक्षा 1 से 12 तक के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों के साथ-साथ सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को शुक्रवार के लिए बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं। इसके अलावा ऋषिकेश तहसील के हरिपुरकलां क्षेत्र में कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए 31 जुलाई से 11 अगस्त तक सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में ऑफलाइन कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। इस अवधि में कई विद्यालय ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई जारी रख सकते हैं। केदारनाथ यात्रा पर बड़ा असर लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर पहाड़ी से मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने लगे हैं। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी है। जानकारी के अनुसार लगभग 850 श्रद्धालु विभिन्न सुरक्षित स्थानों पर रोके गए हैं। प्रशासन ने उनके भोजन, ठहरने और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की है। जैसे ही मार्ग सुरक्षित होगा, यात्रा दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया जाएगा। बद्रीनाथ हाईवे बंद, यमुनोत्री मार्ग खुला चमोली जिले में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर मलबा और चट्टानें गिरने के कारण बंद हो गया है। सीमा सड़क संगठन (BRO) और लोक निर्माण विभाग की मशीनें लगातार सड़क खोलने में जुटी हुई हैं। वहीं, कई दिनों से बंद पड़ा यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग कड़ी मशक्कत के बाद यातायात के लिए खोल दिया गया है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को कुछ राहत मिली है। 91 से अधिक सड़कें बंद भारी बारिश और भूस्खलन के कारण पूरे उत्तराखंड में 91 से अधिक सड़कें बंद हैं। इनमें कई ग्रामीण सड़कें, संपर्क मार्ग और प्रमुख मोटर मार्ग शामिल हैं। सड़कें बंद होने से अनेक गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट गया है। बिजली और पेयजल व्यवस्था भी कई इलाकों में प्रभावित हुई है। संबंधित विभागों की टीमें युद्धस्तर पर बहाली कार्य में लगी हुई हैं। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मुख्यमंत्री और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग की टीमें चौबीसों घंटे राहत एवं बचाव कार्य के लिए तैयार हैं। नदी किनारे बसे गांवों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। लोगों के लिए एडवाइजरी अनावश्यक यात्रा करने से बचें। नदी, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें। मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक सूचना का ही पालन करें। चारधाम यात्रा पर जाने से पहले मार्ग की स्थिति की जानकारी अवश्य लें। किसी भी आपात स्थिति में तुरंत 1070 या 112 पर संपर्क करें। निष्कर्ष उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। मौसम विभाग का अलर्ट, बंद सड़कें, स्कूलों में अवकाश और केदारनाथ यात्रा का स्थगित होना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। प्रशासन पूरी तरह सतर्क है, लेकिन नागरिकों की सावधानी ही इस प्राकृतिक चुनौती से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है। Post Views: 9 Post navigation हरिद्वार में जंगली हाथी का कहर: बेटे के सामने 65 वर्षीय वन गुर्जर को पटक-पटककर मार डाला, पेड़ पर चढ़कर बची दो लोगों की जान चमोली में बारिश बनी आफत: किमाणा गांव में पहाड़ी से भारी भूस्खलन, घरों में घुसा मलबा; 20 परिवार प्रभावित, मंदिर भी क्षतिग्रस्त