2027 की तैयारी में भाजपा का संगठन मंथन, चमोली हादसे पर कांग्रेस ने सरकार को घेरा
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हल्द्वानी/चमोली | उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर भारतीय जनता पार्टी ने कुमाऊं में संगठन को चुनावी मोड में लाने के लिए महत्वपूर्ण बैठक कर रणनीति पर मंथन किया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ने चमोली में लगातार सामने आ रहे हादसों को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। भाजपा जहां बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और नाराज कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने की तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस सुरक्षा व्यवस्था और सरकारी परियोजनाओं में सेफ्टी ऑडिट को लेकर सरकार को घेर रही है।

गोलापार में भाजपा का चुनावी मंथन

हल्द्वानी के गोलापार-चोरगलिया क्षेत्र में भाजपा की महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक आयोजित हुई। बैठक में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कुमाऊं मंडल के वरिष्ठ पदाधिकारी, विधायक और सांसद शामिल हुए।

बैठक का मुख्य फोकस वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करना और जमीनी स्तर पर पार्टी की तैयारियों को गति देना रहा। पार्टी ने बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर चर्चा की।

भाजपा की ओर से 19 अगस्त से बूथ सशक्तिकरण अभियान शुरू किए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही ऐसे कार्यकर्ताओं और नेताओं को फिर से संगठन की मुख्यधारा में लाने पर जोर दिया जा रहा है, जो किसी कारण से पार्टी गतिविधियों से दूर या नाराज चल रहे हैं।

रिवर्स पलायन को लेकर भी भाजपा की रणनीति

बैठक में पहाड़ों से पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। भाजपा धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को रोजगार से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है।

पार्टी का फोकस धार्मिक पर्यटन, स्थानीय संस्कृति और रोजगार के अवसरों को आपस में जोड़कर पहाड़ों में युवाओं के लिए आर्थिक अवसर पैदा करने पर है। इसके लिए आने वाले समय में विभिन्न स्तरों पर सम्मेलन आयोजित किए जाने की योजना है।

‘शुद्धिकरण विवाद’ पर धामी का कांग्रेस पर हमला

हल्द्वानी में कांग्रेस की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित शुद्धिकरण को लेकर पैदा हुए विवाद का असर भी राजनीतिक बयानबाजी में दिखाई दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए विपक्ष पर जातिगत राजनीति के जरिए समाज को बांटने का आरोप लगाया।

धामी के बयान के बाद इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं।

चमोली हादसों को लेकर कांग्रेस का सरकार पर हमला

दूसरी तरफ कांग्रेस ने चमोली में सामने आए हादसों को लेकर प्रदेश सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं ने पुराने नमामि गंगे STP हादसे से लेकर हालिया टनल दुर्घटना तक का हवाला देते हुए परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों के पालन पर सवाल उठाए हैं।

जुलाई 2023 में चमोली के नमामि गंगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट परिसर में करंट फैलने की घटना में 16 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में एक पुलिस उपनिरीक्षक और होमगार्ड जवान भी शामिल थे। बाद में हुई मजिस्ट्रेट जांच में विद्युत व्यवस्था, शॉर्ट सर्किट और खराब अर्थिंग समेत कई तकनीकी खामियों को हादसे से जोड़ा गया था।

पुरानी रिपोर्टों पर कार्रवाई को लेकर सवाल

कांग्रेस का आरोप है कि हादसों के बाद जांच और सुरक्षा ऑडिट की बातें तो होती हैं, लेकिन उनकी सिफारिशों को धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जाता। विपक्ष का कहना है कि यदि परियोजनाओं में नियमित और गंभीर सुरक्षा ऑडिट किए जाएं तथा कमियों को समय रहते दूर किया जाए तो कई हादसों को रोका जा सकता है।

कांग्रेस नेताओं ने चमोली में हालिया निर्माणाधीन हाइड्रो टनल हादसे को भी इसी संदर्भ में उठाया है। पीपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन टनल में पानी और मलबा घुसने की घटना में कई मजदूरों की जान चली गई। इस घटना के बाद सुरक्षा मानकों और राहत-बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मुआवजे को लेकर भी कांग्रेस का सवाल

कांग्रेस ने हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों के लिए घोषित मुआवजे को भी अपर्याप्त बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहकर हादसे की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए और यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि परियोजना में सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ।

भाजपा बनाम कांग्रेस: 2027 से पहले मुद्दों की जमीन तैयार

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति के संकेत देने शुरू कर दिए हैं। भाजपा संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, नाराज कार्यकर्ताओं को जोड़ने और सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की तैयारी में है।

वहीं कांग्रेस सरकार के सामने रोजगार, पलायन, आपदा प्रबंधन, परियोजनाओं की सुरक्षा और हादसों में जवाबदेही जैसे मुद्दे रखकर राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है।

अब बड़ा सवाल यह है कि 2027 के चुनाव में उत्तराखंड की जनता के बीच संगठन और विकास का भाजपा का एजेंडा ज्यादा प्रभावी होगा या सुरक्षा, जवाबदेही और सरकारी व्यवस्था को लेकर कांग्रेस का हमला राजनीतिक मुद्दा बनेगा?