चमोली के पीपलकोटी में THDC टनल हादसा: 8 श्रमिकों की मौत, 2 अब भी लापता; पांचवें दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
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चमोली | उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में THDC के विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में हुए भीषण हादसे के बाद पांचवें दिन भी राहत और बचाव अभियान जारी है। अब तक 8 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2 श्रमिक अभी भी लापता हैं। दोनों लापता श्रमिकों की तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें टनल के भीतर लगातार अभियान चला रही हैं।

अचानक टनल में घुसा पानी और मलबा

13 अगस्त को हुए हादसे में भूस्खलन के बाद टनल के भीतर अचानक बड़ी मात्रा में पानी, मलबा और गाद घुस गई। देखते ही देखते सुरंग का एक बड़ा हिस्सा जलभराव और कीचड़ की चपेट में आ गया। टनल के भीतर काम कर रहे श्रमिकों के लिए हालात बेहद खतरनाक हो गए।

हादसे के बाद तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। शुरुआती घंटों में पानी और मलबे के कारण रेस्क्यू टीमों को टनल के भीतर पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

22 श्रमिक थे टनल के भीतर

रिपोर्टों के अनुसार हादसे के समय करीब 22 श्रमिक टनल के भीतर मौजूद थे। बड़ी संख्या में श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि कई श्रमिक घायल हुए। घायलों को चमोली के जिला अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचाया गया।

रेस्क्यू अभियान के दौरान एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई। अब दो श्रमिकों की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पानी और गाद ने बढ़ाई रेस्क्यू टीमों की मुश्किल

टनल के भीतर पानी और गाद जमा होने के कारण बचाव अभियान बेहद कठिन हो गया है। सुरंग की परिस्थितियां अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। लगातार पानी और कीचड़ के बीच रेस्क्यू टीमों को बेहद सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है।

मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि बचाव दल ने पानी और कीचड़ से भरे हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए अस्थायी साधनों और पंपों की मदद ली। चुनौती यह है कि लापता श्रमिकों तक पहुंचने से पहले टनल के भीतर जमा पानी और मलबे को लगातार हटाना पड़ रहा है।

NDRF, SDRF और ITBP समेत कई एजेंसियां जुटीं

लापता श्रमिकों की तलाश के लिए विभिन्न राहत एवं बचाव एजेंसियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं। NDRF, SDRF, ITBP और अन्य स्थानीय एजेंसियों की टीमें अभियान में जुटी हैं।

बचाव अभियान में सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता दोनों श्रमिकों का पता लगाना है। प्रशासन का कहना है कि अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक लापता श्रमिकों के बारे में स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

हादसे के बाद टनल निर्माण के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि परियोजना से जुड़े दस्तावेजों में चट्टानों की कमजोरी और पानी की मौजूदगी जैसे जोखिमों के संकेत पहले से दर्ज थे। इन दावों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार है।

इस हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड में बड़े हाइड्रो प्रोजेक्ट्स और सुरंग निर्माण के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

पहले भी हो चुका है हादसा

पीपलकोटी स्थित इसी परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य में इससे पहले भी हादसे हो चुके हैं। दिसंबर 2025 में टनल के भीतर दो लोको ट्रेनों की टक्कर में कई श्रमिक घायल हुए थे। अब कुछ ही महीनों बाद हुए इस गंभीर हादसे ने परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों में आक्रोश, मुआवजे की मांग

हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों की चिंता और बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ परिजनों और श्रमिक संगठनों ने घोषित मुआवजे को अपर्याप्त बताते हुए अधिक आर्थिक सहायता और मृतकों के बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाने की मांग की है।

पांचवें दिन भी इंतजार

हादसे को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन दो परिवार अभी भी अपने अपनों के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। टनल के भीतर चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन सिर्फ एक बचाव अभियान नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण बना हुआ है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—टनल के भीतर लापता दोनों श्रमिक कहां हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में रेस्क्यू टीमों को अभी कितना समय लगेगा?

प्रशासन और बचाव एजेंसियों की चुनौती बड़ी है, लेकिन अभियान लगातार जारी है। पूरे प्रदेश की निगाहें अब पीपलकोटी की उस सुरंग पर टिकी हैं, जहां दो परिवार अपने अपनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे हैं।