देहरादून: हर्रावाला आयुर्वेद यूनिवर्सिटी में टंकी पर चढ़े BAMS छात्र, स्टाइपेंड और रिजल्ट को लेकर हंगामा, SDRF तैनात
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देहरादून। हर्रावाला स्थित उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब अपनी मांगों को लेकर आक्रोशित बीएएमएस के चार छात्र परिसर में बनी पानी की करीब 80 फीट ऊंची टंकी पर चढ़ गए। सुबह करीब 9 बजे से शुरू हुआ यह हाई-वोल्टेज ड्रामा दोपहर बाद तक चला। घटना की सूचना मिलते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन से लेकर पुलिस महकमे तक में हड़कंप मच गया और सुरक्षा के लिहाज से मौके पर भारी पुलिस बल, फायर ब्रिगेड और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छात्र हाथों में अपनी मांगों से जुड़ी तख्तियां लिए टंकी पर चढ़े और ऊपर से ही नारेबाजी करने लगे। नीचे परिसर में सैकड़ों अन्य छात्र भी उनके समर्थन में इकट्ठा हो गए और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डोईवाला और रायपुर थाने की पुलिस के साथ ही विश्वविद्यालय के कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक और अन्य आला अधिकारी मौके पर पहुंचे।

क्या हैं छात्रों की मुख्य मांगें?

छात्रों का कहना है कि यह कदम उन्होंने मजबूरी में उठाया है क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन पिछले कई महीनों से उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज कर रहा है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

1. इंटर्नशिप स्टाइपेंड में बढ़ोतरी: यह सबसे बड़ी मांग है। वर्तमान में बीएएमएस इंटर्न को 7,500 रुपये प्रति माह स्टाइपेंड दिया जा रहा है। छात्रों की मांग है कि इसे बढ़ाकर एलोपैथिक मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस इंटर्न के बराबर 17,500 रुपये किया जाए। छात्रों का तर्क है कि दोनों कोर्स की इंटर्नशिप में काम का बोझ लगभग बराबर है, लेकिन मानदेय में भारी अंतर भेदभावपूर्ण है। उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस इंटर्न को 17,000 से 17,500 रुपये मिलते हैं।

2. परीक्षा परिणाम में गड़बड़ी का आरोप: छात्रों का दूसरा बड़ा आरोप परीक्षा परिणाम में धांधली को लेकर है। छात्रों का कहना है कि हाल ही में घोषित हुए परिणामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। कई मेधावी छात्रों को एक या दो विषयों में जानबूझकर फेल कर दिया गया है। छात्र आरोप लगा रहे हैं कि मूल्यांकन में डिजिटल इवैल्यूएशन के नाम पर लापरवाही बरती गई। वे सभी फेल छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा निष्पक्ष तरीके से जांच की मांग कर रहे हैं।

3. एक महीने के भीतर सप्लीमेंट्री परीक्षा: परिणाम में फेल हुए छात्रों का साल बर्बाद न हो, इसके लिए छात्र मांग कर रहे हैं कि एक महीने के भीतर सप्लीमेंट्री परीक्षा आयोजित कराई जाए, ताकि वे अगले सत्र के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

प्रशासन का रवैया और वर्तमान स्थिति

छात्रों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार कुलपति और कुलसचिव को ज्ञापन दिया, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्हें यह आत्मघाती कदम उठाना पड़ा।

घटना के बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए टंकी पर चढ़े छात्रों से बातचीत शुरू की। करीब तीन घंटे तक चली समझाइश के बाद प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर सकारात्मक विचार करने और कॉपियों की री-चेकिंग का लिखित आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद दोपहर करीब 1:30 बजे चारों छात्र सुरक्षित नीचे उतर आए। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने राहत की सांस ली।

यह पहली बार नहीं है जब हर्रावाला परिसर में इस तरह का प्रदर्शन हुआ हो। इससे पहले भी रिजल्ट में देरी और अन्य मांगों को लेकर छात्र टंकी पर चढ़कर प्रदर्शन कर चुके हैं। इससे विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रेस बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सोमवार को इस मामले में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा सकती है।