Spread the loveओकलैंड/न्यूयॉर्क। सोशल मीडिया की दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा समझौता हो गया है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और थ्रेड्स की मालिक कंपनी मेटा (Meta Platforms) बच्चों में बढ़ती सोशल मीडिया की लत से जुड़े मुकदमों को खत्म करने के लिए 17 से 18 अरब डॉलर (करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये) का ऐतिहासिक जुर्माना और मुआवजा देने पर सहमत हो गई है। यह समझौता बुधवार, 26 अगस्त को कैलिफोर्निया के ओकलैंड की फेडरल कोर्ट में हुआ, जहां 47 अमेरिकी राज्यों ने मेटा पर केस किया था। क्या था पूरा मामला? अमेरिका के लगभग सभी राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने आरोप लगाया था कि मेटा ने जानबूझकर फेसबुक और इंस्टाग्राम को ऐसा डिजाइन किया है जिससे बच्चे और किशोर (Teenagers) इसके आदी हो जाएं। आरोप था कि: कंपनी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाया। लाइक, नोटिफिकेशन और इनफिनिटी स्क्रॉल जैसे फीचर्स से डोपामाइन लूप बनाया। कंपनी को पता था कि इससे बच्चों में डिप्रेशन, एंग्जायटी और नींद की कमी बढ़ रही है, फिर भी उसने कुछ नहीं किया। रॉयटर्स के मुताबिक यह मुकदमा सालों से चल रहा था और इसे टेक इंडस्ट्री के लिए निर्णायक केस माना जा रहा था। 18 अरब डॉलर का समझौता – क्या-क्या देना होगा? कोर्ट फाइलिंग के मुताबिक मेटा अगले 10 सालों में 17.1 से 18 अरब डॉलर तक का भुगतान करेगी। लेकिन सिर्फ पैसा ही नहीं, कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म में बड़े बदलाव भी करने होंगे: 1. टीनएजर्स के लिए सख्त लिमिट: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऑटो-प्ले और नोटिफिकेशन रात 10 बजे के बाद बंद। दिन में 1 घंटे से ज्यादा इस्तेमाल पर ब्रेक का रिमाइंडर। ब्यूटी फिल्टर और एडिक्टिव एल्गोरिदम पर रोक। 2. पैरेंटल कंट्रोल: माता-पिता को बच्चों का पूरा डैशबोर्ड दिखेगा। 3. सेफ्टी मेजर्स: मेटा को अब हर 6 महीने में कोर्ट को रिपोर्ट देनी होगी कि उसने बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या किया। एसोसिएटेड प्रेस (AP) के मुताबिक यह समझौता “रियल चेंज, रियल अकाउंटेबिलिटी” लाएगा। दुनिया भर में असर इस समझौते ने दुनिया भर में सोशल मीडिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है। रॉयटर्स की एक दूसरी रिपोर्ट में कहा गया है कि इसने बच्चों की सुरक्षा के लिए वैश्विक लड़ाई में नया मोर्चा खोल दिया है। ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर दुनिया का पहला प्रतिबंध लगाया था। यूरोपीय यूनियन भी डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत मेटा, टिकटॉक और स्नैपचैट पर जांच कर रहा है। भारत में भी संसदीय कमेटी ने बच्चों के डेटा और लत पर सवाल उठाए हैं। मेटा के लिए कितना बड़ा झटका? 18 अरब डॉलर मेटा के लिए बड़ा अमाउंट है, लेकिन कंपनी के पास कैश रिजर्व बहुत है। 2025 में मेटा का रेवेन्यू 165 अरब डॉलर था। लेकिन असली झटका भरोसे का है। कंपनी के CEO मार्क जुकरबर्ग ने अभी तक इस पर कोई पर्सनल बयान नहीं दिया है, लेकिन कंपनी ने कहा है कि वह “बच्चों के लिए सुरक्षित और सकारात्मक अनुभव” बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता तंबाकू कंपनियों के 1998 के 206 अरब डॉलर के समझौते जैसा है, जिसने पूरी इंडस्ट्री को बदल दिया था। अब इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स को अपना एल्गोरिदम बदलना पड़ेगा। यह फैसला साफ दिखाता है कि अब सरकारें सोशल मीडिया को सिर्फ टेक कंपनी नहीं, बल्कि पब्लिक हेल्थ के खतरे के तौर पर देख रही हैं। Post Views: 15 Post navigation होंडा ने भारत में लॉन्च की चार दमदार प्रीमियम बाइक्स, कीमत ₹13.20 लाख से शुरू करोड़ों मोबाइल यूजर्स के लिए बदल गया रिचार्ज का नियम