Uttarakhand में Madrasa पर Action, 5 Sealed Total 20 Closed
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दरसों पर बड़ा एक्शन: उत्तराखंड में 5 और मदरसे सील, अब तक 20 पर ताला – नए अल्पसंख्यक शिक्षा नियम के तहत सरकार सख्त

देहरादून, 6 सितंबर 2026: उत्तराखंड में अवैध रूप से संचालित मदरसों के खिलाफ धामी सरकार का अभियान तेज हो गया है। राज्य सरकार के नए शिक्षा नियमों और कड़े रुख के तहत आज 5 और मदरसों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई है। इस नई कार्रवाई के बाद अब तक नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल बंद या अनुशासनात्मक दायरे में आए मदरसों की संख्या बढ़कर 20 पहुंच गई है।

प्रशासन के अनुसार ये सभी मदरसे बिना मान्यता और तय शैक्षिक मानकों को पूरा किए बिना चल रहे थे। जांच में इनके पास जरूरी दस्तावेज नहीं मिले, जिसके बाद इन्हें सील कर दिया गया।

देहरादून और कुमाऊं में कार्रवाई

सूत्रों के अनुसार आज की ताजा कार्रवाई देहरादून और हल्द्वानी क्षेत्र में की गई है। इन मदरसों में न तो छात्रों की संख्या का सही रिकॉर्ड था, न ही शिक्षकों की योग्यता से जुड़े दस्तावेज। कुछ जगहों पर तो भवन का नक्शा और फायर सेफ्टी तक के मानक पूरे नहीं मिले।

इससे पहले 17 मदरसों को प्रशासन द्वारा सीधे सील किया गया था, जबकि 3 मदरसों के प्रबंधकों ने खुद लिखित आश्वासन देकर अपने संचालन को बंद कर दिया था। इस तरह अब आंकड़ा 20 तक पहुंच गया है। राज्य में इससे पहले अवैध मदरसों के खिलाफ चलाए गए बड़े अभियान में 180 मदरसे सील किए जा चुके हैं।

मदरसा बोर्ड खत्म, अब नया कानून

उत्तराखंड में इस कार्रवाई के पीछे सरकार का नया शिक्षा ढांचा है। सरकार ने 30 जून 2026 को उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड का अस्तित्व खत्म हो गया है और अब उसकी जगह ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ यानी USEMA ने ले ली है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले विधानसभा सत्र में ही इस बात का ऐलान किया था कि अब सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एक ही छत के नीचे लाया जाएगा। नई व्यवस्था के तहत अब मदरसा समेत सभी अल्पसंख्यक संस्थानों की मान्यता उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से होगी।

30 सितंबर अंतिम तारीख

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने प्रदेश के सभी मदरसों का रिकॉर्ड तलब किया है। सभी को 30 सितंबर 2026 तक नए प्राधिकरण से मान्यता लेना अनिवार्य कर दिया गया है। यदि कोई संस्था बिना मान्यता के धार्मिक शिक्षा देती पाई गई तो उसे अवैध माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

चौंकाने वाली बात यह है कि बोर्ड भंग हुए दो महीने बीत चुके हैं, फिर भी 200 से ज्यादा मदरसों ने अभी तक मान्यता के लिए आवेदन तक नहीं किया है। प्राधिकरण अब ऐसे संस्थानों की सूची तैयार कर शासन को भेज रहा है।

क्या हैं नए नियम?

नए अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम के तहत अब हर मदरसे को स्कूलों वाले नियमों का पालन करना होगा। इसमें –

  1. छात्रों को आधुनिक शिक्षा – विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर की पढ़ाई अनिवार्य
  2. शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता और प्रशिक्षण
  3. भवन, शौचालय, पेयजल और सुरक्षा मानक
  4. छात्रों का उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड में पंजीकरण

सरकार का कहना है कि यह किसी समुदाय के खिलाफ कार्रवाई नहीं है, बल्कि बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने की कोशिश है।

मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा है कि कानून से कोई समझौता नहीं होगा। प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है।

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