Spread the loveबागेश्वर। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर कहर बनकर टूटा है। बागेश्वर जिले में बीती रात हुई मूसलाधार बारिश ने पूरे जिले का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। जिले की सबसे महत्वपूर्ण सड़क राष्ट्रीय राजमार्ग गरुड़-बागेश्वर (NH-109K) रवाईखाल के पास भारी भूस्खलन के कारण पूरी तरह से ठप हो गई है। पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक कर सड़क पर आ गिरा है, जिससे कई फीट तक मलबा जमा हो गया है।सुबह से ही इस मार्ग पर यातायात पूरी तरह बंद है। बागेश्वर से देहरादून, हल्द्वानी और दिल्ली जाने वाली सभी बसें और छोटे वाहन रास्ते में ही फंसे हुए हैं। स्कूल जाने वाले छात्र-छात्राएं, शिक्षक और सरकारी कार्यालयों के कर्मचारी घंटों से सड़क खुलने का इंतजार कर रहे हैं। प्रशासन पुरानी JCB मशीनों के सहारे मलबा हटाने में जुटा है, लेकिन पहाड़ी से लगातार पत्थर गिरने से राहत कार्य में भारी परेशानी आ रही है।जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, केवल NH ही नहीं, बल्कि जिले की लगभग 12 मुख्य मोटर मार्ग और 32 से अधिक ग्रामीण संपर्क सड़कें भी पूरी तरह बंद हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक काफली-कमेड़ा, बदियाकोट-बोरबलड़ा, कपकोट-पिंडारी, बाछम-खाती, मुनार-गांसी, हरिनगरी-पय्या, डंगोली-सैलानी जैसे महत्वपूर्ण मार्गों पर आवागमन पूरी तरह बंद है। असौं-फाल्दा क्षेत्र में तो पूरी सड़क ही नदी के तेज बहाव में बह गई है। कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कट गया है और वहां राशन-पानी की किल्लत की भी खबरें आ रही हैं।इस भारी बारिश के कारण कपकोट क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क भी पूरी तरह ध्वस्त हो गया है, जिससे प्रशासन को भी नुकसान का सही आकलन करने में दिक्कत हो रही है। PWD के अनुसार प्रदेश भर में 318 से अधिक सड़कें बंद हैं और केवल बागेश्वर में ही मार्गों को खोलने के लिए दर्जनों मशीनें लगाई गई हैं।बघर गांव में धंस रही जमीन, जोशीमठ जैसे हालातसड़कें बंद होने से भी बड़ा खतरा अब जमीन धंसने का बन गया है। कपकोट तहसील के बघर गांव में भारी भू-धंसाव ने ग्रामीणों में भारी दहशत फैला दी है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव को जोड़ने वाले सभी रास्ते पहले ही बह चुके हैं और अब गांव के अंदर ही अलग-अलग जगहों पर जमीन धंस रही है। घरों के आंगन और खेतों में दरारें दिखाई देने लगी हैं।बघर अकेला नहीं है। बागेश्वर जिला प्रशासन ने पहले ही जिले के 11 गांवों को भू-धंसाव के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील घोषित किया है। इनमें कपकोट के कुंवारी, सूपी, सेरी, दोबाड़, बड़ैत, हरसिंगियाबगड़, कर्मी, बघर, सरण, खाती और बाछम गांव शामिल हैं। इन गांवों में हर मानसून में जोशीमठ जैसे हालात बन जाते हैं।स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का आरोप है कि कपकोट और कांडा ब्लॉक में बड़े पैमाने पर हो रहे सोपस्टोन खनन के कारण पहाड़ खोखले हो गए हैं। बागेश्वर के गांवों में खनन के प्रभाव पर अध्ययन कर रहे चंद्रशेखर द्विवेदी के अनुसार, “खदानों के कारण मानसून में हर साल गांवों में भू-धंसाव होता है और मकानों में दरारें आती हैं।”प्रशासन अलर्ट पर, IMD ने जारी किया यलो अलर्टहालात बिगड़ने के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। कपकोट के क्षेत्रीय विधायक सुरेश गढ़िया, उपजिलाधिकारी, तहसीलदार देर रात से ही आपदाग्रस्त क्षेत्रों में पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं। रात में पुलिस ने डुगडुगी बजाकर नदी किनारे बसे लोगों को सतर्क भी किया।इधर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 9 और 10 सितंबर को देहरादून, बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल और अल्मोड़ा में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। सरयू और गोमती नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है और सरयू खतरे के निशान के करीब बह रही है।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अगले 24 घंटे तक अनावश्यक पहाड़ी यात्रा से बचें और किसी भी आपात स्थिति में जिला आपदा कंट्रोल रूम को सूचित करें। Post Views: 2 Post navigationनैनीताल से हल्द्वानी शिफ्टिंग का रास्ता लगभग साफ, हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती उत्तराखंड में आफत: देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी में भारी बारिश अलर्ट