देहरादून में Digital Arrest का साया: फर्जी CBI-ED बनकर लूट रहे करोड़ों, जानिए कैसे बचें इस नए साइबर जाल से
Spread the love

देहरादून। उत्तराखंड की शांत वादियों में अब एक नया और बेहद खतरनाक साइबर अपराध तेजी से पांव पसार रहा है – नाम है Digital Arrest। ये एक ऐसी ठगी है जिसमें अपराधी कानून और पुलिस का डर दिखाकर लोगों को उनके ही घर में बंधक बना लेते हैं, वो भी बिना हाथ लगाए। पिछले कुछ महीनों में देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ बुजुर्गों, सरकारी कर्मचारियों और महिलाओं से लाखों रुपये ऐंठ लिए गए।

कैसे फंसाते हैं ठग? मुंबई क्राइम ब्रांच से FedEx तक का जाल

इस फ्रॉड की शुरुआत एक सामान्य फोन कॉल से होती है। आपके पास कॉल आएगा कि आपके नाम का एक पार्सल मुंबई एयरपोर्ट पर पकड़ा गया है, जिसमें ड्रग्स, पासपोर्ट और हवाला के पैसे हैं। या फिर कहा जाएगा कि आपके आधार कार्ड का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।

आप कुछ समझ पाते, उससे पहले ही कॉल मुंबई क्राइम ब्रांच, CBI या ED के तथाकथित अधिकारी को ट्रांसफर कर दी जाती है। फिर WhatsApp या Skype पर वीडियो कॉल आती है। सामने पुलिस की वर्दी पहने, पीछे तिरंगा और अशोक स्तंभ लगा एक व्यक्ति खुद को बड़ा अधिकारी बताता है। वो आपको बताता है कि आपके खिलाफ गंभीर केस दर्ज है और आप Digital Arrest में हैं। आपको घर में ही एक कमरे में रहने, फोन का कैमरा ऑन रखने और किसी से भी बात न करने को कहा जाता है। कई बार तो नकली सुप्रीम कोर्ट का लेटरहेड भी दिखाया जाता है।

इसी डर के बीच असली खेल शुरू होता है। केस को रफा-दफा करने के लिए आपसे आपके बैंक खातों को वेरिफाई करने के नाम पर सारा पैसा एक खाते में ट्रांसफर करवाया जाता है, या फिर कहा जाता है कि आपका पैसा सरकार के पास सुरक्षित रहेगा, जांच के बाद लौटा दिया जाएगा। एक बार पैसा ट्रांसफर होते ही ठग गायब हो जाते हैं।

याद रखें – Digital Arrest जैसा कोई कानून ही नहीं है

देहरादून साइबर सेल और भारत सरकार ने साफ किया है कि लोगों को तीन बातें हमेशा याद रखनी चाहिए।

पहला, कानून में Digital Arrest जैसा कोई प्रावधान नहीं है। भारत का कोई भी कानून या एजेंसी किसी को भी वीडियो कॉल पर गिरफ्तार करने या नजरबंद करने की इजाजत नहीं देती। गिरफ्तारी हमेशा फिजिकल होती है और उसका एक तय कानूनी प्रोसेस है।

दूसरा, असली पुलिस कभी पैसे की मांग नहीं करती। कोई भी असली सरकारी अधिकारी, चाहे वो CBI हो, ED हो या लोकल पुलिस, कभी भी केस खत्म करने या वेरिफिकेशन के नाम पर गिफ्ट वाउचर, क्रिप्टोकरेंसी या बैंक ट्रांसफर के जरिए पैसे नहीं मांगता।

तीसरा, समन हमेशा लिखित में होता है। किसी भी एजेंसी का नोटिस हमेशा आधिकारिक लेटरहेड पर, डाक या ईमेल के जरिए आता है, न कि WhatsApp कॉल पर।

अगर ऐसी कॉल आए तो क्या करें?

अगर आपके पास भी ऐसी कोई कॉल आती है तो घबराएं नहीं। सबसे पहले तुरंत कॉल काट दें। ठग आपको लगातार कॉल पर बने रहने और किसी को न बताने का दबाव बनाएंगे, उनकी बातों में बिल्कुल न आएं। अपने बैंक अकाउंट, आधार, पैन या OTP जैसी कोई भी निजी जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को न दें। सबसे जरूरी है, तुरंत अपने परिवार या किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इस बारे में बताएं।

ठगी होने पर तुरंत करें ये काम, पहला घंटा सबसे कीमती

अगर गलती से पैसा चला भी गया है तो समय बर्बाद न करें। तुरंत केंद्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, घटना के पहले 1-2 घंटे को Golden Hour कहा जाता है, इस दौरान शिकायत करने पर पैसे को होल्ड करवाकर वापस लाने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर जाकर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराएं। अपनी सभी चैट, ट्रांजेक्शन डिटेल और नंबर का स्क्रीनशॉट संभाल कर रखें। साथ ही अपने नजदीकी थाने या पटेलनगर स्थित देहरादून साइबर क्राइम थाने में लिखित शिकायत दें।

याद रखें, जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। इस जानकारी को अपने माता-पिता और बुजुर्गों तक जरूर पहुंचाएं, क्योंकि वही इस ठगी के सबसे आसान शिकार बनते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *