किशाऊ बांध परियोजना को मिली हरी झंडी, 8 साल पुराना विवाद खत्म
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नई दिल्ली / देहरादून। उत्तर भारत के 6 राज्यों के लिए एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। दशकों से अटकी पड़ी किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना (Kishau Multipurpose Dam Project) को लेकर आखिरकार सहमति बन गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में छह राज्यों ने इस परियोजना के क्रियान्वयन के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई है।

बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल, जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू मौजूद रहे।

6 राज्य कौन से हैं शामिल?

इस परियोजना में यमुना बेसिन के 6 लाभार्थी राज्य शामिल हैं:

  1. उत्तराखंड
  2. हिमाचल प्रदेश
  3. हरियाणा
  4. राजस्थान
  5. उत्तर प्रदेश
  6. दिल्ली

क्या है किशाऊ बांध परियोजना?

किशाऊ बांध उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी पर बनाया जाएगा। टोंस नदी यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी है।

  • ऊंचाई: 236 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध
  • जल भंडारण: 1,324 मिलियन घन मीटर लाइव स्टोरेज
  • बिजली उत्पादन: 422 मेगावाट
  • अनुमानित लागत: लगभग 15,000 करोड़ रुपये

पैसों का पेंच कैसे सुलझा?

परियोजना पिछले 8 साल से लागत साझा करने को लेकर अटकी हुई थी। नई सहमति के अनुसार फॉर्मूला तय किया गया है:

जल घटक (Water Component) की लागत का 90% केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10% बोझ छह राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।

सबसे बड़ा फैसला हिमाचल प्रदेश को लेकर हुआ। हिमाचल अपने हिस्से का पानी दिल्ली और राजस्थान को देगा, इसके बदले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा हिमाचल के पावर कंपोनेंट की लागत वहन करेंगे। हिमाचल सरकार के अनुसार इससे राज्य को सालाना 100 करोड़ यूनिट बिजली और करीब 600 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा।

उत्तराखंड और दिल्ली को क्या फायदा?

सरकार के अनुसार यह फैसला यमुना के स्वच्छ और पुनर्जीवित होने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा, जिससे नदी में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ेगा।

  • उत्तराखंड / हिमाचल: स्वच्छ जलविद्युत और रोजगार
  • दिल्ली: राजधानी के लिए अतिरिक्त कच्चा पानी उपलब्ध होगा, जो लंबे समय से जल संकट से जूझ रही है।
  • किसान: ऊपरी यमुना बेसिन में सिंचाई को मजबूती मिलेगी।

MoU पर हस्ताक्षर के बाद अब इस परियोजना को मंजूरी के लिए केंद्रीय कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।