Uttarakhand में MBBS Admission Scam, चार फर्जी डॉक्टरों के एडमिशन Cancel
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देहरादून। अगर आप सोच रहे हैं कि मेडिकल में एडमिशन सिर्फ NEET में टॉप रैंक लाने से मिलता है, तो देहरादून से सामने आई इस खबर ने सिस्टम की पोल खोल दी है। यहां स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर MBBS की सीट हथियाने का बड़ा मामला पकड़ा गया है।

मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया। हेमवती नंदन बहुगुणा मेडिकल विश्वविद्यालय ने आनन-फानन में चार छात्राओं के एडमिशन को निरस्त कर दिया है।

कैसे हुआ खुलासा?

दरअसल, यह पूरा खेल पिछले महीने शुरू हुआ। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा को कुछ दस्तावेजों पर शक हुआ। उन्होंने देखा कि स्वतंत्रता सेनानी कोटे के तहत जिन लोगों ने MBBS में एडमिशन लिया है, उनके प्रमाण पत्रों में काफी गड़बड़ी है।

उन्होंने 3 सितंबर को जिलाधिकारी देहरादून को लिखित शिकायत दी और 7 नामों की लिस्ट सौंपी। शिकायत ETV Bharat पर आने के बाद जिला प्रशासन को मजबूरन जांच बैठानी पड़ी।

जांच में क्या निकला? एक ही नाम, 4 अलग-अलग लड़कियां

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने मामले को गंभीरता से लिया और एडीएम प्रशासन स्मृता परमार के नेतृत्व में एक टीम बनाई। फील्ड जांच की जिम्मेदारी एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह को दी गई।

जब टीम ने फाइलें खोलीं तो होश उड़ गए।

तृप्ति, स्वाति, खुशी और परी – इन चारों अलग-अलग नाम की छात्राओं ने एडमिशन के लिए एक ही स्वतंत्रता सेनानी का नाम बताया था – धर्मवीर वर्मा पुत्र खजान सिंह।

जब पुरानी पंजिकाओं को खंगाला गया, तो इस नाम का कोई स्वतंत्रता सेनानी ही रिकॉर्ड में नहीं मिला। यानी प्रमाण पत्र ही पूरी तरह से फर्जी था।

टीम जब इनके दिए गए पते राजीवनगर और तरली कांडोली में सत्यापन के लिए पहुंची, तो वहां न तो छात्रा मिलीं और न ही उनका परिवार। पड़ोसियों ने भी ऐसे किसी नाम के व्यक्ति को वहां रहने से इनकार कर दिया।

सिर्फ एक प्रमाण पत्र नहीं, पूरा जाल फर्जी

शुरुआत में लग रहा था कि मामला सिर्फ स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र (DFF) तक है, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पूरा रैकेट सामने आ गया।

जांच टीम को पता चला कि इन छात्राओं के स्थायी निवास प्रमाण पत्र भी फर्जी तरीके से बने हुए हैं। हैरानी की बात ये है कि एक ही फोटो का इस्तेमाल करके दो-दो आधार कार्ड तक बना दिए गए थे।

इससे साफ है कि ये अकेले छात्रों का काम नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है जो फर्जी दस्तावेज तैयार करता है। बिना जांच के इन प्रमाण पत्रों पर मुहर लगाने वाले पटवारी और अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी अब संदेह के घेरे में है।

अब तक क्या एक्शन हुआ?

इस पूरे मामले में प्रशासन ने अब तक चार बड़े कदम उठाए हैं:

1. एडमिशन रद्द: HNB मेडिकल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने चारों छात्राओं के MBBS दाखिले रद्द कर दिए हैं। अब इन चारों सीटों को खाली मानकर अगली काउंसलिंग में जोड़ा जाएगा।

2. सर्टिफिकेट निरस्त: एसडीएम सदर ने जांच रिपोर्ट के आधार पर चारों स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र और उनके निवास प्रमाण पत्रों को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया है।

3. FIR दर्ज: देहरादून के दो अलग-अलग थानों में 5 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि इसमें एक ही परिवार की मां-बेटी भी शामिल हैं।

4. दायरा बढ़ा: अब जिला प्रशासन ने फैसला किया है कि सिर्फ इसी साल नहीं, बल्कि पिछले 3-4 सालों में DFF कोटे से जितने भी MBBS एडमिशन हुए हैं, उन सभी की दोबारा जांच की जाएगी।

यह कार्रवाई उन हजारों मेधावी छात्रों के हक की लड़ाई है जो ईमानदारी से पढ़ाई करके भी एक-एक नंबर से रह जाते हैं, जबकि फर्जी दस्तावेज वाले उनकी सीट ले जाते हैं।

रिपोर्ट: अजय सेमल्टी, देहरादून