डोईवाला के थानों और खता क्षेत्र में फलदार पेड़ों के अवैध कटान से आक्रोश, वन विभाग की कार्रवाई
Spread the love

डोईवाला /देहरादून ।  डोईवाला क्षेत्र के थानों और खता क्षेत्र में बिना अनुमति के फलदार पेड़ काटे जाने के मामले सामने आए हैं। स्थानीय लोगों की शिकायत के बाद वन विभाग ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की है।

क्या है मामला?

स्थानीय लोगों के अनुसार थानों क्षेत्र में पशु चिकित्सालय के सामने मुख्य मार्ग के किनारे कुछ फलदार पेड़ रात के समय काटे गए। लोगों का कहना है कि कटान के बाद पेड़ों के ठूंठों को छिपाने का प्रयास किया गया।

इससे पहले खता क्षेत्र में भी आम और लीची के पेड़ों के कटान की सूचना मिली थी। बताया जा रहा है कि वहां जमीन मालिक ने मौखिक अनुमति का हवाला दिया था, जिस पर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई।

वन विभाग ने क्या कार्रवाई की?

थानों रेंज के अधिकारियों के अनुसार शिकायत मिलने पर टीम मौके पर गई और काटी गई लकड़ी को जब्त कर लिया गया। चूंकि ये पेड़ फलदार प्रजाति के हैं, इसलिए नियमानुसार आगे की कार्रवाई के लिए उद्यान विभाग को भी सूचित किया गया है।

वन विभाग का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है कि कटान के लिए सक्षम प्राधिकारी से लिखित अनुमति ली गई थी या नहीं।

उत्तराखंड में निजी भूमि पर पेड़ काटने का नियम क्या है?

उत्तराखंड में 15 प्रजातियों के पेड़ों को प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है। इसमें आम, लीची, अखरोट जैसे फलदार पेड़ शामिल हैं।

सरकार के अनुसार, “15 प्रतिबंधित प्रजातियों को छोड़कर लोगों को बाकी पेड़ों को काटने के लिए अब वन विभाग से अनुमति नहीं लेनी होगी। आम, अखरोट और लीची के फलदार पेड़ प्रतिबंधित प्रजाति में शामिल रहेंगे।”

निजी भूमि पर भी इन प्रतिबंधित फलदार पेड़ों को काटने के लिए रेंज ऑफिसर से अनुमति लेनी होती है और यह निजी इस्तेमाल जैसे गृह निर्माण के लिए ही दी जाती है। बिक्री के लिए काटने पर प्रतिबंध है। नई व्यवस्था में इसके लिए ‘अपणी सरकार’ पोर्टल के माध्यम से भूमि स्वामित्व प्रमाण और पेड़ों के फोटो के साथ आवेदन करना होता है।

हाईवे प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि में बढ़ी संवेदनशीलता

गौरतलब है कि जुलाई-अगस्त 2026 में ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन परियोजना के तहत सात मोड़ क्षेत्र में पेड़ों के कटान के प्रस्ताव पर जनविरोध हुआ था, जिसके बाद शासन स्तर पर कटान पर फिलहाल रोक लगाई गई है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के मामलों को लेकर पर्यावरण प्रेमियों में चिंता देखी जा रही है।

फिलहाल वन विभाग और उद्यान विभाग की संयुक्त जांच जारी है।

रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAYAVANI