Spread the loveनैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस के ऑनलाइन FIR पोर्टल और ‘देवभूमि मोबाइल ऐप’ के संचालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अदालत के समक्ष पोर्टल के काम न करने और आम लोगों को FIR की जानकारी उपलब्ध कराने में आ रही दिक्कतों का मुद्दा उठाया गया। मामले में याचिकाकर्ता नेशनल पब्लिक ट्रस्ट, हरिद्वार की ओर से आरोप लगाया गया कि सार्वजनिक FIR पोर्टल बंद होने के कारण शिकायतकर्ताओं और उनके अधिवक्ताओं को मुकदमों से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में परेशानी हो रही है। याचिकाकर्ता ने इसे सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के विपरीत बताया, जिनके तहत FIR को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। सुनवाई के दौरान उत्तराखंड पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि पोर्टल और ऐप से संबंधित पुराने तकनीकी मुद्दों को दूर कर लिया गया है तथा अब आम लोग FIR डाउनलोड कर सकते हैं। हालांकि, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत के समक्ष उसी दिन ऐप में लॉग-इन नहीं हो पाने का मामला रखा। इस पर हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए व्यवस्था को वास्तविक रूप से सुचारू करने के निर्देश दिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पोर्टल निर्धारित तरीके से शुरू नहीं हुआ तो अगली सुनवाई में पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है। अदालत ने 23 सितंबर 2026 को मामले की अगली सुनवाई तय करते हुए राज्य सरकार को एक तकनीकी विशेषज्ञ पेश करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ अदालत में Live Demo के माध्यम से यह प्रदर्शित करेगा कि ऐप और पोर्टल किस प्रकार काम कर रहे हैं तथा आम नागरिक बिना परेशानी के FIR डाउनलोड कर सकता है या नहीं। अब 23 सितंबर को होने वाले इस तकनीकी प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी। इसके बाद अदालत पोर्टल की वास्तविक स्थिति और पुलिस द्वारा किए गए सुधारों पर आगे के निर्देश जारी कर सकती है। रिपोर्ट: अजय सेमल्टी / HIMALAYAVANI Post Views: 11 Post navigation नंदा देवी बड़ी जात के दौरान पातर नचौणिया में मारपीट, सात से अधिक घायल; एक को हेलीकॉप्टर से ऋषिकेश भेजा नैनीताल में नंदा-सुनंदा महोत्सव की धूम, 23 सितंबर को निकलेगी भव्य शोभायात्रा